
स्वराज इंडिया ब्यूरो/कानपुर। लगातार जलभराव की समस्या के बीच कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय ने शहर के पुराने तालाबों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा है। गुरुवार को पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेखों के अनुसार कानपुर विकास प्राधिकरण की पुरानी सीमा के 86 गांवों में 312 तालाब दर्ज हैं, लेकिन इनमें कई तालाबों के अस्तित्व और मौजूदा स्थिति की जांच जरूरी है।
महापौर ने मंडलायुक्त और केडीए उपाध्यक्ष से इन तालाबों को चिह्नित कराने तथा उनकी जमीन पर हुए संभावित अतिक्रमण की जांच के लिए टीम गठित करने की मांग की है। उन्होंने तालाबों की मूल सीमाएं राजस्व अभिलेखों के आधार पर तय करने के लिए ड्रोन और GIS सर्वे कराने का सुझाव भी दिया।
जलभराव और तालाबों के बीच कनेक्शन पर जोर
प्रमिला पांडेय ने कहा कि पहले बारिश का अतिरिक्त पानी तालाबों में पहुंचता था, जिससे शहर में जलभराव की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती थी। उनका कहना है कि तालाबों के खत्म होने या उनकी जमीन पर निर्माण होने से प्राकृतिक जल निकासी और जल संचयन की व्यवस्था प्रभावित हुई है। यह उनका सार्वजनिक रूप से दिया गया तर्क है; तालाबों पर अतिक्रमण और जलभराव के बीच स्थानीय स्तर पर विस्तृत तकनीकी जांच अभी जरूरी है।
हाल के दिनों में कानपुर के कई इलाकों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति सामने आई है। 23 सितंबर को दक्षिण कानपुर के कई हिस्सों में भारी बारिश के बाद सड़कें पानी से भर गईं और किदवई नगर सहित कुछ क्षेत्रों में नाले ओवरफ्लो होने की रिपोर्ट सामने आई।
हर तालाब का बने रिकॉर्ड
महापौर ने मांग की है कि प्रत्येक तालाब का रिकॉर्ड तैयार किया जाए, जिसमें उसकी मूल जमीन, वर्तमान क्षेत्रफल, सीमाएं और संभावित अतिक्रमण की जानकारी दर्ज हो। यदि किसी सरकारी एजेंसी द्वारा तालाब की जमीन पर विकास कार्य किए गए हैं, तो उनके दस्तावेज और अनुमति की भी जांच किए जाने की बात कही गई है।
महापौर ने यह भी कहा कि कानपुर नगर निगम अकेले शहर की जलभराव समस्या के लिए जिम्मेदार नहीं है और विभिन्न विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने अधिकारियों से फील्ड में उतरकर समस्याओं का निरीक्षण करने की जरूरत पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री के सामने भी उठ चुका है मुद्दा
महापौर के मुताबिक कानपुर के एक तालाब से जुड़े अतिक्रमण का मामला पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उठाया जा चुका है। अब उन्होंने मंडलायुक्त से उच्चस्तरीय समिति गठित कर तालाबों की स्थिति की जांच कराने की मांग दोहराई है।
मामले में आगे की तस्वीर सर्वे और विभागीय जांच के बाद स्पष्ट होगी कि कितने तालाब वास्तविक रूप से मौजूद हैं, कितने हिस्से में बदलाव या अतिक्रमण हुआ है और किन मामलों में कार्रवाई की आवश्यकता है।


