
स्वराज इंडिया ब्यूरो/फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश। फिरोजाबाद के नारखी क्षेत्र में नसबंदी शिविर के दौरान ऑपरेशन की प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आशा कार्यकर्ता सपना चौहान ने आरोप लगाया है कि एक महिला की नसबंदी के दौरान एनेस्थीसिया दिए बिना ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। मरीज को दर्द होने पर उन्होंने सवाल उठाए तो कथित तौर पर डॉक्टर और उनके बीच विवाद हो गया। मामला अब पुलिस तक पहुंच गया है।
ऑपरेशन के दौरान दर्द की शिकायत, आशा कार्यकर्ता ने उठाए सवाल
शिकायत के मुताबिक, घटना 17 अक्टूबर 2026 की है। सपना चौहान अपने क्षेत्र की एक महिला को नसबंदी कराने के लिए जाटऊ स्थित स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंची थीं। वहां नसबंदी सर्जन डॉ. अनीता कुमारी ऑपरेशन कर रही थीं।
सपना चौहान का आरोप है कि महिला को एनेस्थीसिया दिए बिना ही ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, जिससे उसे दर्द होने लगा। उन्होंने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मरीज को उचित चिकित्सा सुविधा देने की बात कही। इसी दौरान विवाद होने का आरोप है।
डॉक्टर पर अभद्रता और गर्म चाय फेंकने का आरोप
सपना चौहान ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि विरोध करने पर डॉक्टर ने उनका हाथ पकड़कर ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकाल दिया। उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, नौकरी से निकलवाने की धमकी देने और गर्म चाय फेंकने का भी आरोप लगाया है।
ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और घटना के सभी पहलुओं की जांच होना बाकी है। डॉक्टर का पक्ष और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
20 से अधिक आशा कार्यकर्ता पहुंचीं थाने
मामले की जानकारी मिलने के बाद 20 से अधिक आशा कार्यकर्ता नारखी थाने पहुंचीं। उन्होंने सपना चौहान के समर्थन में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की सुरक्षा और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पुलिस जांच पर टिकी नजर
आशा कार्यकर्ताओं के मुताबिक, उन्होंने पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को भी शिकायत दी थी। इसके बाद पुलिस को लिखित तहरीर सौंपी गई। पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
इस प्रकरण में अब दो अहम सवाल हैं—क्या नसबंदी की प्रक्रिया निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार हुई थी और विरोध के दौरान आशा कार्यकर्ता के साथ वास्तव में क्या हुआ? इन सवालों का जवाब जांच और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही मिल सकेगा।
फिलहाल, आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। मामले में स्वास्थ्य विभाग की जांच और संबंधित डॉक्टर का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।


