
उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में निर्माणाधीन ‘ॐ पुल’ को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। पुल के डिजाइन, ऊंचाई और धार्मिक प्रतीक के इस्तेमाल को लेकर स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि पुल का मौजूदा स्वरूप कैंची धाम की प्राकृतिक और आध्यात्मिक पहचान से मेल नहीं खाता।भीमताल के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाई है और निर्माण की समीक्षा की मांग की है। हालांकि, फिलहाल पुल को अवैध घोषित नहीं किया गया है और न ही किसी अदालत ने इसके निर्माण पर रोक लगाई है।
भारी-भरकम कंक्रीट का ढांचा
विरोध करने वालों का कहना है कि पुल का मौजूदा ढांचा कैंची धाम के शांत, प्राकृतिक और पारंपरिक माहौल के अनुरूप नहीं है। उनका दावा है कि इससे धाम का मूल स्वरूप प्रभावित हो सकता है।
मंदिर से ज्यादा ऊंचाई को लेकर आपत्ति
स्थानीय लोगों की एक बड़ी आपत्ति पुल की ऊंचाई को लेकर है। उनका कहना है कि निर्माणाधीन पुल की ऊंचाई मंदिर से अधिक दिखाई देती है, जिससे मंदिर की दृश्यता और उसकी प्रमुखता प्रभावित हो सकती है।
कुछ कोणों से उल्टा नजर आता है ‘ॐ’
पुल के डिजाइन में बनाए गए ‘ॐ’ के आकार को लेकर भी विवाद है। विरोध करने वालों का दावा है कि कुछ स्थानों से देखने पर यह धार्मिक प्रतीक उल्टा दिखाई देता है। इसी वजह से डिजाइन में बदलाव या दोबारा समीक्षा की मांग की जा रही है।
कुछ कोणों से उल्टा नजर आता है ‘ॐ’
पुल के डिजाइन में बनाए गए ‘ॐ’ के आकार को लेकर भी विवाद है। विरोध करने वालों का दावा है कि कुछ स्थानों से देखने पर यह धार्मिक प्रतीक उल्टा दिखाई देता है। इसी वजह से डिजाइन में बदलाव या दोबारा समीक्षा की मांग की जा रही है।
कैंची धाम की प्राकृतिक सुंदरता पर असर
कैंची धाम अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शांत आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। विरोध करने वालों का कहना है कि यहां होने वाले आधुनिक निर्माण आसपास के पर्यावरण और धाम की मौजूदा पहचान के अनुरूप होने चाहिए, ताकि इसकी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक माहौल बरकरार रहे।
फिलहाल ‘ॐ पुल’ को लेकर उठी आपत्तियों के बीच विवाद जारी है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इन शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं और क्या पुल के डिजाइन या निर्माण में कोई बदलाव किया जाता है।


