
सतीश मिश्रा की बढ़ी जिम्मेदारी, संगठन से लेकर सामाजिक समीकरण साधने की कवायद
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 में करीब छह महीने का समय बचा है। ऐसे में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने चुनावी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी में हाल के संगठनात्मक बदलावों से संकेत मिल रहे हैं कि इस बार बसपा संगठन को मजबूत करने के साथ सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है। इसी क्रम में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को संगठन और चुनाव प्रचार में अहम भूमिका सौंपी है, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा की जिम्मेदारियां भी बढ़ाई गई हैं।आकाश आनंद संभालेंगे संगठन और प्रचारआकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी गई है। प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया में भी उनकी भूमिका अहम होगी। विधानसभा स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलनों में संभावित प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा की जाएगी। आकाश आनंद ने 10 अगस्त को हाथरस के सादाबाद से अपने अभियान की शुरुआत की। इसके बाद 25 अगस्त को गौतमबुद्ध नगर के जेवर में भी उनकी अध्यक्षता में कार्यकर्ता सम्मेलन प्रस्तावित है। पार्टी के मुताबिक, लखनऊ में हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद उन्हें दोनों राज्यों में संगठन और चुनावी गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी दी गई है।हालांकि, मायावती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टिकट वितरण का अंतिम फैसला उन्हीं के हाथ में रहेगा। आकाश आनंद की भूमिका संगठन और प्रचार तक महत्वपूर्ण जरूर होगी, लेकिन प्रत्याशियों के चयन पर अंतिम मुहर मायावती ही लगाएंगी। इससे पार्टी में नेतृत्व और अधिकार का संतुलन भी स्पष्ट होता है।
सतीश मिश्रा पर बढ़ा भरोसा
बसपा ने दूसरी ओर राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा की जिम्मेदारियों का विस्तार किया है। अब कानूनी और मीडिया संबंधी कार्यों के साथ चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की जिम्मेदारी भी उनके पास होगी।मायावती ने सोशल मीडिया के जरिए कहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत बसपा सभी वर्गों में अपना जनाधार मजबूत कर रही है। प्रत्याशियों के चयन और घोषणा की प्रक्रिया विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ता सम्मेलनों के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है।ब्राह्मण चेहरे को आगे करने के पीछे रणनीतिसतीश चंद्र मिश्रा लंबे समय से बसपा के ब्राह्मण चेहरे के रूप में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख ब्राह्मण नेताओं के पार्टी से दूर होने के कारण बसपा के सामने इस सामाजिक समीकरण को बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ी है।नकुल दुबे के कांग्रेस में जाने से लेकर रामवीर उपाध्याय, रंगनाथ मिश्रा और विनय शंकर तिवारी जैसे नेताओं के पार्टी से दूर होने तक कई घटनाक्रम सामने आए हैं। हाल ही में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को भी पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किया गया। ऐसे में सतीश चंद्र मिश्रा पर बढ़ा भरोसा केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि ब्राह्मण और सर्वसमाज के पुराने सामाजिक समीकरण को फिर से मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।युवा चेहरा और अनुभवी रणनीतिकार का मेलबसपा की मौजूदा रणनीति में एक ओर आकाश आनंद के जरिए युवा नेतृत्व और सक्रिय संगठन का संदेश देने की कोशिश है, तो दूसरी ओर सतीश चंद्र मिश्रा के अनुभव के जरिए पार्टी अपने पुराने सामाजिक आधार को साधना चाहती है।2027 का विधानसभा चुनाव बसपा के लिए खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कुछ चुनावों में पार्टी के कमजोर होते प्रदर्शन के बीच उसके सामने अपना पारंपरिक वोट बैंक बचाने के साथ नए सामाजिक समीकरण तैयार करने की चुनौती है। ऐसे में आकाश आनंद की आक्रामक संगठनात्मक सक्रियता और सतीश मिश्रा का अनुभव—बसपा की चुनावी रणनीति के दो प्रमुख आधार बनते दिखाई दे रहे हैं।अब निगाह इस बात पर होगी कि मायावती की यह दोहरी रणनीति पार्टी को कितना मजबूत करती है और क्या बसपा 2027 में अपने खोए जनाधार को वापस हासिल करने में कामयाब हो पाती है।


