Tuesday, September 1, 2026
Homeब्रेकिंग न्यूजचित्रकूट में बाढ़ से भारी तबाही, 16 गांव प्रभावित; 700 से ज्यादा...

चित्रकूट में बाढ़ से भारी तबाही, 16 गांव प्रभावित; 700 से ज्यादा लोग सुरक्षित निकाले गए, घरों में 5 फीट तक कीचड़

Chitrakoot Flood: मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ से हुई तबाही का मंजर सामने आने लगा है. कई गांवों में घरों के अंदर तक कीचड़ और मलबा भर गया है, जबकि रामघाट का पुल भी तेज बहाव में टूट गया.उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में मंदाकिनी नदी की बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे आ रहा है, लेकिन बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोगों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. जिले के करीब 16 गांव बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. प्रशासन के मुताबिक 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. कई घरों के अंदर करीब 5 फीट तक कीचड़ और मलबा जमा हो गया है.बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे. दोनों अधिकारियों ने तरौहां समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर जमीनी स्थिति देखी. राहत एवं बचाव कार्य में लगी टीमों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं.प्रशासन की टीमें निचले और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं. लोगों से नदी के किनारे और जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की जा रही है.बाढ़ का पानी कम होने के बाद ग्रामीण अब अपने घरों को साफ करने में जुटे हैं. कई मकानों के अंदर कई फीट तक कीचड़ जमा है. घरों में रखे फ्रिज, कूलर और दूसरे सामान भी कीचड़ और पानी से खराब हो गए हैं. सड़कों पर जगह-जगह मलबा और कचरा फैला हुआ है.कई स्थानों पर बिजली के खंभे टूटने से भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है. बाढ़ के बाद प्रभावित  के सामने घरों की सफाई और रोजमर्रा की जिंदगी को दोबारा शुरू करने की चुनौती है . मंदाकिनी के तेज बहाव ने रामघाट इलाके में भी भारी नुकसान पहुंचाया है. यहां बना पुल टूटकर नदी में गिर गया. इसके अलावा तुलसीदास की प्रतिमा भी बाढ़ की चपेट में आ गई. प्रतिमा का कंधे के ऊपर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है.पानी कम होने के बाद रामघाट और आसपास के इलाकों में बाढ़ से हुए नुकसान की तस्वीरें सामने आने लगी हैं. स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों को भी भारी नुकसान की चिंता सता रही है.बाढ़ के दौरान फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाया. दो हेलिकॉप्टर और SDRF की टीमों की मदद से करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाला गया.गोबरिया गांव में 12 लोग पानी से घिरने के बाद करीब चार घंटे तक पीपल के पेड़ पर बैठे रहे. चारों तरफ पानी होने की वजह से वे नीचे नहीं उतर पा रहे थे. रेस्क्यू टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला.SDRF के जवानों ने कई घरों में फंसे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया. बाढ़ के दौरान कई परिवारों ने अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों पर शरण ली थी.चित्रकूट में लगातार हुई बारिश और मध्य प्रदेश के बरगी डैम से पानी छोड़े जाने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था. नदी में करीब 30 फीट तक उफान आने की जानकारी सामने आई थी.बाढ़ का पानी कई इलाकों में मकानों की पहली मंजिल तक पहुंच गया था. लोगों को अपना घर छोड़कर छतों पर जाना पड़ा. अब पानी उतरने के बाद लोग वापस लौट रहे हैं, लेकिन घरों में जमा कीचड़ और मलबे ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.मंदाकिनी में उफान के बाद अब यमुना के तटवर्ती इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है. नदी किनारे बसे गांवों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. रामघाट और आसपास के घाटों पर भी सतर्कता बरती जा रही है.सिंचाई विभाग और प्रशासन की टीमें जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं. निचले इलाकों में पानी बढ़ने की आशंका के चलते ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.बाढ़ की पिछली मार से अभी दुकानदार पूरी तरह उबर भी नहीं पाए थे कि बढ़ते जलस्तर ने उनकी चिंता फिर बढ़ा दी. कई दुकानदार अपने सामान को सुरक्षित जगहों पर ले जाने में जुटे हैं.फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों की सुरक्षा, राहत-बचाव और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करना है. प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!