
2019 में भाई सुनील सिंह की हत्या के बाद अरविंद सिंह के मन में पत्नी बबीता को लेकर शक और गहरा हो गया था। महामृत्युंजय पाठ के दौरान भी पत्नी और पुरोहितों से उसका विवाद हुआ था।
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गहजी गांव में हुए हत्याकांड की जांच के दौरान मामले से जुड़ी कई पुरानी बातें सामने आ रही हैं। एनकाउंटर में मारे गए अरविंद सिंह के भाई सुनील सिंह की 2019 में हत्या कर दी गई थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस घटना के बाद अरविंद मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था और पत्नी बबीता को लेकर उसका शक भी बढ़ता गया था।
साल 2019 में सुनील सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में उसके चचेरे भाइयों मनीष और अविनाश के नाम सामने आए थे। बताया गया कि सुनील और मनीष के बीच विवाद की वजह शक था। सुनील के साथ अरविंद को भी शक था कि बबीता का मनीष से अफेयर है। इसी दौरान सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी और छेड़खानी की शिकायत भी की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच रंजिश बढ़ गई और सुनील की हत्या कर दी गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भाई की हत्या के बाद अरविंद अपनी पत्नी को भी इस घटना के लिए जिम्मेदार मानने लगा था। इसके बाद पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होने की बात सामने आई है। परिवार और आसपास के लोगों के अनुसार, अरविंद के मन में पत्नी को लेकर शक लगातार बना हुआ था।सुनील की मौत के बाद बबीता को लगता था कि उसकी आत्मा घर में भटक रही है। इसी वजह से उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में पांच दिवसीय महामृत्युंजय पाठ कराया गया था। पाठ के अंतिम दिन दो पुरोहित, महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा, घर में मौजूद थे।
बताया गया कि अरविंद बाजार से घर पहुंचा तो वहां धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। उसने पुरोहितों से पूजा को लेकर सवाल-जवाब शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने दोनों पुरोहितों से आधार कार्ड भी मांगा। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया।स्थानीय लोगों के मुताबिक, अरविंद पहले से ही भाई की हत्या और पत्नी को लेकर शक जैसी बातों से परेशान था। ऐसे में भाई की आत्मा की शांति के लिए कराया जा रहा महामृत्युंजय पाठ भी उसके गुस्से की वजह बना। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से ही हो सकेगी।
आरोप है कि पुरोहितों से विवाद के बाद अरविंद कमरे के भीतर गया और अपनी लाइसेंसी राइफल लेकर बाहर आया। इसके बाद उसने पत्नी बबीता को गोली मार दी। फिर पूजा करा रहे दोनों पुरोहितों पर भी फायरिंग कर दी। गोलियों की आवाज सुनकर ग्रामीण घटनास्थल की ओर पहुंचे तो अरविंद अपने तीन बच्चों के साथ एक कमरे में बंद हो गया। इसी दौरान उसने आठ साल के बेटे को भी गोली मार दी।इसके बाद पुलिस ने करीब सात घंटे तक ऑपरेशन चलाया। पुलिस टीम ने अरविंद को सरेंडर करने के लिए समझाने की कोशिश की। रिश्तेदारों के जरिए भी उससे बातचीत कराई गई, लेकिन वह कमरे से बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ।
ADG नवीन अरोड़ा के मुताबिक, अरविंद बच्चों को अपनी ढाल बताते हुए पुलिस को पीछे हटने के लिए कह रहा था। करीब सात घंटे बाद कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पुलिस टीम ने स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया।पुलिस के मुताबिक, अंदर पहुंचते ही अरविंद ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायर किए। बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया। उसे और घायल बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।


