
स्वराज इंडिया ब्यूरो/कानपुर/लखनऊ | 1 अक्टूबर 2026
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को कई मोर्चों की नई प्रदेश टीम का ऐलान किया। इस सूची में कानपुर निवासी अनस साजिद उस्मानी को भाजपा के उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मंजूरी के बाद यह घोषणा की गई।
अनस साजिद उस्मानी इससे पहले भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा में प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वह कानपुर से जुड़े हैं और उनका परिवार लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़ा रहा है। उनके पिता तनवीर हैदर उस्मानी भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं।
खाली चल रहे पद पर अनस की नियुक्ति
अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का पद कुंवर बासित अली के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुआ था। अब पार्टी ने अनस साजिद उस्मानी को यह जिम्मेदारी सौंप दी है।
भाजपा ने इसी के साथ पिछड़ा वर्ग, महिला, किसान और अनुसूचित मोर्चा समेत कई संगठनों की नई प्रदेश और क्षेत्रीय टीमों का भी ऐलान किया है।
सुशील कटियार को BJP पिछड़ा वर्ग मोर्चा में जिम्मेदारी
नई सूची में सुशील कटियार को भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ कुल 12 प्रदेश उपाध्यक्षों के नाम घोषित किए गए हैं। वहीं प्रणीत भाटी, ज्योति सोनी, शिवनाथ चौधरी और ऋषि चौरसिया को प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है।
पिछड़ा वर्ग मोर्चा के छह क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय अध्यक्षों की भी घोषणा की गई है। कानपुर क्षेत्र में मनोज राजपूत को क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
कई मोर्चों की नई टीम घोषित
भाजपा ने गुरुवार को अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के साथ महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित मोर्चा की प्रदेश टीमों में भी नियुक्तियां कीं। अनुसूचित मोर्चा में विकास किशोर समेत कई नेताओं को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि महिला और किसान मोर्चा में भी प्रदेश पदाधिकारियों की घोषणा की गई है।
पार्टी की ओर से घोषित नई टीमों में अलग-अलग सामाजिक समूहों से जुड़े नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है। रिपोर्टों में इसे भाजपा के मिशन-2027 की संगठनात्मक तैयारियों से जोड़कर देखा गया है।
कानपुर के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति
कानपुर से आने वाले अनस साजिद उस्मानी को प्रदेश स्तर पर अल्पसंख्यक मोर्चे की कमान मिलने से स्थानीय भाजपा संगठन में भी इसे महत्वपूर्ण नियुक्ति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि उनकी नियुक्ति का आगामी चुनाव में क्या राजनीतिक प्रभाव होगा, यह भविष्य की परिस्थितियों और पार्टी की चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।
भाजपा की नई मोर्चा टीमों के ऐलान के साथ अब प्रदेश संगठन में विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समूहों को दी गई जिम्मेदारियों पर भी चर्चा तेज हो गई है।


