
स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ/आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में और तेज हो गया है। सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग की। आगरा में ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास की दीवार और मुख्य गेट पर आपत्तिजनक नारे लिखे गए, जबकि लखनऊ में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।
कांग्रेस इन प्रदर्शनों को मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों के विरोध के रूप में पेश कर रही है। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है और आयोग ने कहा है कि उसके महत्वपूर्ण फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
आगरा में CEC के घर पर प्रदर्शन, दो कांग्रेस नेता गिरफ्तार
आगरा के विजय नगर स्थित ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के पहुंचने के बाद विवाद हुआ। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने घर की दीवार और मुख्य गेट पर आपत्तिजनक संदेश लिखे तथा परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। घर में ज्ञानेश कुमार के बुजुर्ग माता-पिता रहते हैं।
पुलिस ने इस मामले में कांग्रेस प्रदेश महासचिव संगठन अनिल यादव और मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर को गिरफ्तार/हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि दोनों अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे थे और प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई।
CEC के पिता ने जताई नाराजगी
ज्ञानेश कुमार के पिता डॉ. सुबोध कुमार ने कहा कि घटना के समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि कुछ लोग घर पर आए थे और वहां आपत्तिजनक बातें लिखी गईं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों को उनके बेटे से शिकायत है तो उन्हें अपना विरोध ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जताना चाहिए था। उनके मुताबिक, उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं था।
लखनऊ में पुलिस से भिड़े कांग्रेस कार्यकर्ता
लखनऊ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और पुलिस द्वारा हटाए जाने के दौरान सड़क पर बैठ गए। कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस बसों में बैठाकर ईको गार्डन ले गई।
प्रदर्शन में यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा और पार्टी के कई अन्य नेता एवं कार्यकर्ता शामिल रहे।

काशी समेत कई शहरों में प्रदर्शन
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध सिर्फ लखनऊ और आगरा तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस ने अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन किए। वाराणसी में महिला कार्यकर्ताओं के चूड़ियां लेकर प्रदर्शन करने की जानकारी सामने आई है। अन्य शहरों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर विरोध जताया।
इससे पहले 25 सितंबर को भी कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन कर CEC के इस्तीफे की मांग की थी। यूपी समेत कई राज्यों में कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च किया था।

आखिर SIR को लेकर विवाद क्या है?
पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची का Special Intensive Revision (SIR) अभियान है। SIR को लेकर विपक्ष की ओर से मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस बीच द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार इनमें कुछ आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और SIR से जुड़े मामलों पर थीं।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई। हालांकि, आयोग की ओर से कहा गया कि उसके महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आंतरिक विचार-विमर्श के दौरान अधिकारियों द्वारा टिप्पणियां या आपत्तियां दर्ज करना प्रक्रिया का हिस्सा है।
भाजपा की ओर से भी कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया गया है। यूपी भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 26 सितंबर के आयोग के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि SIR समेत प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
कांग्रेस का आरोप, भाजपा और आयोग का अलग पक्ष
कांग्रेस का कहना है कि SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और इसी वजह से पार्टी CEC के इस्तीफे की मांग कर रही है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं, जबकि भाजपा कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक अभियान के तौर पर देख रही है।
ऐसे में विवाद के केंद्र में अब तीन मुद्दे हैं—SIR की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और आयोग की निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता। इन मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
आगे क्या?
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया को लेकर यह विवाद राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण दे चुका है।
फिलहाल आगरा में CEC के पैतृक आवास पर हुए प्रदर्शन के मामले में पुलिस की कार्रवाई और SIR को लेकर राजनीतिक टकराव दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। आगे की तस्वीर जांच, आयोग की प्रक्रिया और विभिन्न पक्षों के आधिकारिक बयानों से और स्पष्ट होगी।


