
मथुरा/वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध मौत की जांच के बीच उनके आश्रम से जुड़े जीवन को लेकर कई जानकारियां सामने आई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक दीपक मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर क्षेत्र के रहने वाले थे और करीब दो साल पहले वृंदावन आकर प्रेमानंद महाराज की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़े थे।
मथुरा पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्यों, परिस्थितियों तथा फोरेंसिक जांच के आधार पर मौत की वजह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। शुरुआती पुलिस जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है, हालांकि मामले को लेकर अलग-अलग सवाल और दावे भी सामने आए हैं।
आश्रम से जुड़ने के बाद सेवा में जुटे थे दीपक
टीवी9 की रिपोर्ट के अनुसार, आश्रम से जुड़ने के बाद दीपक ने वहां रहकर सेवा कार्य किया। अन्य सेवकों और शिष्यों की तरह वह भी आश्रम की व्यवस्थाओं में योगदान देते थे।
उनके आध्यात्मिक जीवन का एक पहलू मधुकरी से भी जुड़ा बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दीपक को रिंकू सिंह के साथ ब्रज क्षेत्र में मधुकरी मांगते हुए देखा गया। वीडियो में एक महिला उन्हें मधुकरी देती नजर आती है।
क्या थी मधुकरी की परंपरा?
ब्रज की वैष्णव परंपरा में साधु-संतों द्वारा घर-घर जाकर भिक्षा या मधुकरी ग्रहण करना आध्यात्मिक जीवन की एक प्रचलित साधना मानी जाती है। सामने आए वीडियो के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि दीपक ने भी कुछ समय इस तरह की साधना में बिताया था। हालांकि उनके पूरे दैनिक जीवन या आश्रम में उनकी निश्चित जिम्मेदारियों की आधिकारिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है।
करीबी रंगीली दास ने किए कई दावे
दीपक के करीबी बताए जा रहे रंगीली दास, जिनका मूल नाम राजू पटेल बताया गया है, ने उनके आश्रम जीवन को लेकर कई बातें साझा की हैं।
टीवी9 के मुताबिक, रंगीली दास का दावा है कि दीपक करीब दो महीने तक प्रेमानंद महाराज के आश्रम में रहे थे। उनके अनुसार, दीपक ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार रहने तथा भजन करने की बात कही गई थी।
रंगीली दास ने यह भी दावा किया कि दीपक के आश्रम आने-जाने पर रोक नहीं थी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है, इसलिए इन्हें उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राधा अष्टमी पर आखिरी मुलाकात का दावा
रंगीली दास के मुताबिक, उनकी दीपक से आखिरी मुलाकात राधा अष्टमी के दिन हुई थी। उस समय दीपक आश्रम में साधु सेवा कर रहे थे। रंगीली दास का कहना है कि दीपक ने उनसे किसी परेशानी या तनाव की बात नहीं कही थी।
हालांकि, किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति के बारे में केवल किसी परिचित के बयान के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इस मामले में पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्य ही घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।
सफेद वस्त्रों को लेकर भी चर्चा
दीपक को कई मौकों पर सफेद वस्त्रों में देखे जाने की बात भी सामने आई है। प्रेमानंद महाराज से जुड़ी आध्यात्मिक परंपरा में अलग-अलग अवसरों पर विभिन्न रंगों के वस्त्र दिखाई देते हैं।
आम आध्यात्मिक व्याख्याओं में सफेद रंग को शांति, सादगी और पवित्रता से जोड़ा जाता है, जबकि पीले रंग का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के पीतांबर से बताया जाता है। हालांकि दीपक विशेष रूप से सफेद वस्त्र क्यों पहनते थे, इस बारे में आश्रम की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मौत की जांच में अब तक क्या सामने आया?
25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज परिसर में दीपक की मौत की सूचना सामने आई थी। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और मामले की जांच शुरू की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस घटनाक्रम को समझने के लिए सीसीटीवी, फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है।
परिवार की ओर से भी आश्रम से जुड़े कुछ सवाल उठाए गए हैं, जबकि पुलिस की जांच अभी जारी है। ऐसे में किसी भी दावे को अंतिम तथ्य मानने से पहले जांच के निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।
निष्कर्ष
दीपक लोधी का आश्रम से जुड़ा जीवन सेवा, भजन और ब्रज की आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ा बताया जा रहा है। मधुकरी मांगने का वीडियो और करीबी रंगीली दास के बयान उनके आध्यात्मिक जीवन के कुछ पहलुओं पर रोशनी डालते हैं, लेकिन इन दावों के सभी हिस्सों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं उनकी संदिग्ध मौत की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है। इसलिए आश्रम में उनकी भूमिका, अंतिम दिनों की परिस्थितियों और मौत की वजह से जुड़े किसी भी निष्कर्ष के लिए आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी होगा।


