
स्वराज इंडिया ब्यूरो/फगवाड़ा। पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा के कथित यौन उत्पीड़न की खबर को लेकर शुरू हुआ छात्र विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों के बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुटे और मामले में तत्काल कार्रवाई तथा जवाबदेही की मांग की। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, कुछ वाहनों और सामान में आग लगाए जाने तथा जालंधर-फगवाड़ा नेशनल हाईवे (NH-44) को जाम किए जाने की घटनाएं सामने आईं।
हालांकि, कथित यौन उत्पीड़न की घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। LPU प्रशासन ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें अफवाह और आधारहीन बताया है। वहीं पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित किया है। पुलिस का कहना है कि जांच में फोरेंसिक साक्ष्य, CCTV फुटेज और मोबाइल फोन से जुड़ी तकनीकी जानकारी को देखा जाएगा।
सोशल मीडिया दावों के बाद शुरू हुआ विरोध
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, रविवार तड़के करीब 2 बजे छात्राओं के हॉस्टल के आसपास विरोध शुरू हुआ। छात्रों के बीच यह दावा फैलने लगा कि गर्ल्स हॉस्टल में एक छात्रा के साथ कथित यौन हिंसा हुई और मामले में समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कुछ छात्रों ने हॉस्टल में पुरुष कर्मचारियों की तैनाती पर भी सवाल उठाए और महिला छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की।
FIR दर्ज, SIT करेगी जांच
मामले में पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की है। जालंधर रेंज के DIG नवीन सिंगला के मुताबिक जांच को वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। CCTV फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य और फोन डेटा की जांच की जाएगी।
जांच के लिए गठित SIT में पुलिस अधिकारियों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच के जरिए आरोपों की वास्तविकता सामने लाई जाएगी।
LPU ने आरोपों को बताया आधारहीन
दूसरी ओर, LPU प्रशासन ने कथित घटना से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी सूचनाएं फैलाई गईं जिनकी पुष्टि नहीं हुई है और छात्रों, अभिभावकों तथा आम लोगों से अपील की गई है कि वे अपुष्ट जानकारी को आगे न बढ़ाएं।
विश्वविद्यालय की ओर से यह भी कहा गया है कि पुलिस जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है और उपलब्ध CCTV समेत जरूरी रिकॉर्ड जांच एजेंसियों को दिए जाएंगे।
प्रदर्शन के दौरान बिगड़े हालात
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की और कुछ सामान व वाहनों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आईं। NH-44 पर भी छात्रों ने रास्ता रोक दिया, जिससे जालंधर और फगवाड़ा के बीच यातायात प्रभावित हुआ।
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव की घटना के बाद स्थिति नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया। रविवार रात पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचने और एक पुलिस वाहन में आग लगाए जाने की रिपोर्ट सामने आई।
15 घंटे से ज्यादा बाद NH-44 पर यातायात बहाल
प्रदर्शन के कारण जालंधर-फगवाड़ा NH-44 पर 15 घंटे से ज्यादा समय तक यातायात प्रभावित रहा। सोमवार को पुलिस ने बताया कि हाईवे पर आवाजाही बहाल कर दी गई है और स्थिति नियंत्रण में है।
कैंपस में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। पंजाब पुलिस के अधिकारियों के अनुसार 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए और फ्लैग मार्च भी किया गया।
LPU ने 10 दिन के लिए कक्षाएं रोकीं
हिंसक घटनाओं के बाद LPU ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी हैं। विश्वविद्यालय ने मिड-टर्म परीक्षाएं भी अगली सूचना तक टाल दी हैं।
जो छात्र घर जाना चाहते हैं, उन्हें अभिभावकों से सलाह के बाद जाने की अनुमति दी गई है। वहीं कैंपस में रुकने वाले छात्रों को हॉस्टल या अपने आवास में रहने और अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।
छात्रा की दूसरी मौत को लेकर भी जांच जारी
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने करीब दो सप्ताह पहले हुई एक अन्य छात्रा की मौत का मुद्दा भी उठाया। पुलिस ने बताया कि यह अलग मामला है और संबंधित छात्रा का मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस के अनुसार यदि जांच में किसी अपराध या गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं तो कानून के मुताबिक आगे कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले से जुड़ी संवेदनशील जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है
LPU मामले में फिलहाल तीन बातें स्पष्ट हैं—छात्रों की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज हो चुकी है, SIT जांच कर रही है और विश्वविद्यालय आरोपों को खारिज कर रहा है। इसलिए कथित यौन उत्पीड़न की पुष्टि या खंडन का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस का फोकस CCTV, फोरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों की जांच पर है, जबकि विश्वविद्यालय में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।


