
स्वराज इंडिया ब्यूरो/बलरामपुर, 10 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। अखिलेश यादव की ओर से अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री योगी ने पलटवार करते हुए उन्हें भी इसी सीट से नामांकन करने का न्योता दिया। योगी ने कहा कि मुकाबला सीधे होना चाहिए, पार्टी कार्यकर्ताओं या सहयोगियों के बीच नहीं।
शनिवार को बलरामपुर में विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि अखिलेश यादव उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हैं, इसलिए अब दोनों को आमने-सामने आकर अपनी किस्मत आजमानी चाहिए। उनके इस बयान को आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और भाजपा के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है।
अखिलेश की चुनौती पर योगी का सीधा जवाब
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि वे भी अयोध्या से नामांकन करें और वह भी वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुकाबला सामने होना चाहिए, चेलों से क्यों लड़ना।
इससे पहले अखिलेश यादव ने अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। सपा प्रमुख ने भाजपा की चुनावी तैयारियों और अयोध्या में विकास के दावों पर भी सवाल उठाए थे।
योगी के ताजा बयान के बाद अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या अखिलेश यादव इस चुनौती पर कोई नया जवाब देंगे। हालांकि, दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर अभी किसी वास्तविक नामांकन या अंतिम फैसले की घोषणा नहीं हुई है।
803 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात
बलरामपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 803 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 78 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के विकास, बुनियादी सुविधाओं और अपनी सरकार की योजनाओं का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों के जरिए प्रदेश की तस्वीर बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मतदाताओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उनका एक वोट क्षेत्र की दिशा और विकास की प्राथमिकताओं को प्रभावित कर सकता है।
पिछली सरकार पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर कानून-व्यवस्था, सड़कों और अयोध्या की स्थिति को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार में अयोध्या में विकास कार्यों को गति मिली है और धार्मिक नगरी की सुविधाओं में बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए विपक्ष की राजनीति की आलोचना की। ये आरोप मुख्यमंत्री के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थे।
2027 से पहले अयोध्या बनी सियासी चर्चा का केंद्र
अयोध्या धार्मिक महत्व के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी अहम स्थान रखती है। राम मंदिर निर्माण और शहर में जारी विकास परियोजनाओं के बाद यह क्षेत्र भाजपा और विपक्ष, दोनों के राजनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
अखिलेश यादव की चुनौती और योगी आदित्यनाथ के जवाब ने अयोध्या को लेकर राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सपा प्रमुख मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए दोनों दल अपनी रणनीति किस तरह आगे बढ़ाते हैं।


