
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले सुप्रीम कोर्ट के आसपास करीब 60 वकीलों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सामने आया। हिरासत में लिए गए लोगों में वरिष्ठ अधिवक्ता और महिला वकील भी शामिल थीं। मामले पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की। इसके बाद CJI ने संबंधित अधिकारियों से वकीलों को रिहा करने को कहा।
यह घटनाक्रम दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुआ। प्रदर्शन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जानी थी। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने के बीच सुप्रीम कोर्ट के आसपास वकीलों को हिरासत में लिए जाने से कानूनी समुदाय में चिंता बढ़ गई।
SCBA ने CJI से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने सोशल मीडिया के जरिए वकीलों को हिरासत में लिए जाने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वकीलों को कथित रूप से मनमाने ढंग से हिरासत में लेना और उन्हें डराना गंभीर विषय है। उन्होंने हिरासत में लिए गए अधिवक्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की।
SCBA की ओर से मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए अनुरोध में हिरासत में लिए गए वकीलों की स्थिति और उनके ठिकाने की जानकारी सुनिश्चित करने, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और जिन लोगों को हिरासत में रखने का वैध आधार नहीं है, उन्हें रिहा कराने की मांग की गई।
CJI सूर्यकांत के हस्तक्षेप के बाद रिहाई
मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने अधिकारियों से वकीलों को रिहा करने के लिए कहा। इसके बाद SCBA अध्यक्ष प्रदीप राय ने बताया कि उनकी नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त से बातचीत हुई है और वकीलों की रिहाई का आश्वासन मिला है।
बाद में हिरासत में लिए गए वकीलों की रिहाई की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के अधिकारों को लेकर चर्चा तेज कर दी।
प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बढ़ाई गई थी सुरक्षा
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। प्रदर्शन से जुड़े लोगों की हिरासत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे। वकीलों के मामले में SCBA ने कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने की शिकायत की और परिस्थितियों की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग रखी।
हालांकि, हिरासत की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित तथ्यों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
अब कार्रवाई और जवाबदेही पर नजर
वकीलों की रिहाई के निर्देश के बाद अब इस मामले में पुलिस की कार्रवाई, हिरासत के आधार और कथित बल प्रयोग को लेकर उठे सवाल अहम हैं। बार एसोसिएशन ने मामले की परिस्थितियों की समीक्षा और कानून के अनुसार उचित कदम उठाने की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत की कानूनी प्रक्रिया पर बहस को सामने ला दिया है।


