
स्वराज इंडिया ब्यूरो/नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: पिछले करीब तीन महीनों में राहुल गांधी के राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों का अंदाज लगातार चर्चा में रहा है। जुलाई में प्रधानमंत्री आवास के बाहर अचानक धरने से लेकर अगस्त में पुलिस थाने पहुंचने और अक्टूबर में आकाशवाणी भवन तथा जंतर-मंतर की ओर अचानक रुख करने तक, कई मौकों पर उनके कार्यक्रम का अगला कदम आखिरी समय में सामने आया। हालिया घटनाओं को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे राहुल गांधी की बदली हुई ‘सरप्राइज पॉलिटिक्स’ के तौर पर देखा जा रहा है।
21 जुलाई को पीएम आवास के बाहर अचानक धरना
21 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर नेताओं के जुटने के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेता अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़े। वहां राहुल गांधी धरने पर बैठ गए। यह प्रदर्शन छात्रों से जुड़े मुद्दे और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर था। पुलिस ने बाद में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं को वहां से हटाकर हिरासत में लिया।
इस घटनाक्रम की खास बात यह रही कि शुरुआत में खरगे के जन्मदिन के कार्यक्रम के तौर पर दिख रही गतिविधि अचानक राजनीतिक प्रदर्शन में बदल गई। इसी वजह से इसे राहुल गांधी की अचानक दिशा बदलने वाली रणनीति के उदाहरण के तौर पर देखा गया।
21 अगस्त को थाने पहुंचकर धरना
इसके करीब एक महीने बाद 21 अगस्त को राहुल गांधी घायल प्रदर्शनकारी साहिल लोचब के साथ दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे। मामला जुलाई के एक प्रदर्शन के दौरान लोचब को लगी चोटों की शिकायत से जुड़ा था। राहुल गांधी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की और बाद में थाने के बाहर धरने पर बैठ गए।
करीब छह घंटे से अधिक चले धरने के बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की। रिपोर्टों के मुताबिक मामले में उस समय किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया था और जांच जारी थी।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग की ओर मार्च और आकाशवाणी भवन
अक्टूबर की शुरुआत में राहुल गांधी का विरोध-प्रदर्शन सीधे चुनाव आयोग और विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे से जुड़ गया। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसद संसद परिसर से चुनाव आयोग की ओर मार्च कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया।
इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए और वहां धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि वे चुनाव आयोग तक पहुंचना चाहते थे। पुलिस के अनुसार परिसर में प्रवेश को लेकर बाद में मामला दर्ज किया गया। राहुल गांधी और अन्य नेताओं को कई घंटे के धरने के बाद हिरासत में लिया गया।

7 अक्टूबर को लंच से सीधे जंतर-मंतर की ओर कूच
अगले ही दिन 7 अक्टूबर को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने INDIA ब्लॉक के सांसदों के लिए जनपथ स्थित सागर रत्ना में लंच रखा। लंच के बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसद तीन बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर बढ़े। पुलिस ने रास्ते में बसों को रोक दिया और राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया।
इसी दौरान प्रियंका गांधी के सड़क पर बैठने और बाद में लेटने का घटनाक्रम सामने आया। राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। इसके बाद दोनों नेताओं समेत कई विपक्षी सांसदों को पुलिस वाहनों में ले जाया गया।
सपा की गैरमौजूदगी भी बनी चर्चा
7 अक्टूबर के लंच में समाजवादी पार्टी के सांसदों की गैरमौजूदगी भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनी। रिपोर्टों के मुताबिक सपा सांसद इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जबकि एक दिन पहले वे INDIA ब्लॉक के चुनाव आयोग मार्च में मौजूद थे। हालांकि, सपा के लंच में शामिल नहीं होने की वजह को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आईं और इसे केवल राहुल गांधी की रणनीति से जोड़कर देखना पुष्ट तथ्य नहीं है।
आखिर राहुल की रणनीति क्या है
इन घटनाओं को जोड़कर देखें तो राहुल गांधी के हालिया विरोध-प्रदर्शनों में एक पैटर्न दिखाई देता है—पहले से घोषित कार्यक्रम के बजाय मौके के हिसाब से अगला कदम तय करना और प्रदर्शन का केंद्र अचानक बदल देना।
6 अक्टूबर को आकाशवाणी भवन में जाने और 7 अक्टूबर को लंच के बाद बसों से जंतर-मंतर की ओर बढ़ने के घटनाक्रम में भी यही पैटर्न नजर आया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी खेमे में आगे भी प्रदर्शन की योजना को लेकर विवरण सीमित रखने की चर्चा थी, ताकि पुलिस को पहले से पूरी तैयारी का मौका न मिले।
क्या राहुल गांधी के पीछे कोई नया रणनीतिकार है
राहुल गांधी की इस बदली हुई शैली को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि उन्हें कोई नया रणनीतिक इनपुट मिल रहा है। लेकिन कांग्रेस ने अब तक किसी नए रणनीतिकार या सलाहकार के नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए किसी व्यक्ति को इस रणनीति का मास्टरमाइंड बताना फिलहाल अटकल ही होगा।
इतना जरूर है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच राहुल गांधी के सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शनों में संसद और प्रेस कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़कर सड़क, पुलिस स्टेशन और प्रशासनिक प्रतिष्ठानों तक सीधे पहुंचने की शैली दिखाई दी है। 6 और 7 अक्टूबर की लगातार कार्रवाइयों ने इस रणनीति को फिर राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
आगे की रणनीति पर नजर
8 अक्टूबर को कांग्रेस ने देशभर में SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक की रणनीति कितनी बदलेगी और क्या इसी तरह अचानक कार्यक्रम सामने आएंगे, इस पर राजनीतिक नजरें बनी रहेंगी।


