Saturday, October 10, 2026
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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर फिर धंसी सड़क, दो महीने में दूसरी बार मरम्मत से उठे सवाल

स्वराज इंडिया ब्यूरो/Lucknow-Kanpur Expressway News: उत्तर प्रदेश के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की मजबूती को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। 9 अक्टूबर को उन्नाव के बेहटा गांव के पास लखनऊ की ओर जाने वाली लेन में करीब 200 मीटर हिस्से पर धंसाव और सड़क की सतह पर पहियों के निशान जैसी गहरी लकीरें दिखाई दीं। इसके बाद निर्माण एजेंसी PNC की तकनीकी टीम ने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू कराई।

खास बात यह है कि जुलाई में भी इसी क्षेत्र के आसपास सड़क धंसने की समस्या सामने आई थी। ऐसे में दोबारा मरम्मत की जरूरत पड़ने से सड़क की गुणवत्ता, निर्माण प्रक्रिया और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

200 मीटर सड़क पर धंसाव, मरम्मत के लिए मशीनें उतरीं

रिपोर्टों के मुताबिक, एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 65.3 से 65.5 के बीच सड़क की सतह प्रभावित हुई। वाहनों की आवाजाही से सड़क पर गहरी लकीरें बन गई थीं, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के संतुलन बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता था।

स्थिति को देखते हुए निर्माण एजेंसी ने प्रभावित हिस्से की ऊपरी परत को हटाकर सफाई कराई और नई डामर-गिट्टी की परत बिछाने का काम शुरू किया। मरम्मत के दौरान कुछ लेनों पर आवाजाही सीमित रखी गई, ताकि काम पूरा होने तक वाहन सुरक्षित तरीके से निकल सकें।

निर्माण एजेंसी के स्तर पर मरम्मत का काम पूरा किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन सड़क को दोबारा नुकसान पहुंचने के पीछे की वास्तविक वजह की पुष्टि तकनीकी जांच से ही हो सकेगी।

जुलाई में भी सामने आया था सड़क धंसने का मामला

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर इससे पहले जुलाई 2026 के आखिरी सप्ताह में भी सड़क के एक हिस्से में धंसाव की समस्या सामने आई थी। उस समय करीब 300 मीटर हिस्से में स्लिपेज की जानकारी सामने आई थी, जिसके बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सुधार कार्य शुरू कराया था।

इस घटना के बाद निर्माण और निगरानी से जुड़े पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्राधिकरण ने प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच कराने और सड़क को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए थे।

अब अक्टूबर में दोबारा सड़क प्रभावित होने से यह सवाल उठ रहा है कि पहले किए गए सुधार कितने प्रभावी रहे और क्या सड़क के नीचे की परतों की मजबूती का पर्याप्त आकलन किया गया था।

PNC पर कार्रवाई के बावजूद क्यों उठ रहे सवाल

एक्सप्रेसवे पर पहले सामने आई खामियों के बाद NHAI ने ठेकेदार, स्वतंत्र इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। सितंबर में PNC Infratech और उसकी सहयोगी कंपनी पर तीन साल के प्रतिबंध की खबरें भी सामने आई थीं।

इसके बावजूद सड़क के एक हिस्से में फिर धंसाव की सूचना मिलना निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, किसी नई घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित तकनीकी रिपोर्ट और जांच के निष्कर्षों को देखना जरूरी है।

आखिर क्यों बार-बार प्रभावित हो रही है सड़क

सड़क में धंसाव या पहियों के निशान बनने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें मिट्टी के भराव का खिसकना, सड़क के नीचे की परतों का पर्याप्त रूप से मजबूत न होना, जल निकासी में कमी और निर्माण सामग्री या बिछाने की प्रक्रिया से जुड़ी समस्याएं शामिल हो सकती हैं।

लेकिन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के ताजा मामले में इनमें से किसी कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए सड़क की ऊपरी और निचली परतों की जांच, मिट्टी के नमूनों का परीक्षण और निर्माण संबंधी रिकॉर्ड का आकलन जरूरी होगा।

तकनीकी जांच और स्थायी समाधान की जरूरत

बार-बार मरम्मत कराना तत्काल यातायात बहाल करने के लिए जरूरी हो सकता है, लेकिन केवल ऊपरी सतह ठीक कर देना लंबे समय का समाधान साबित होगा या नहीं, यह सड़क के नीचे मौजूद संरचना की स्थिति पर निर्भर करता है।

इसलिए जरूरी है कि प्रभावित हिस्सों की मरम्मत के साथ धंसाव के मूल कारणों की पहचान भी की जाए। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही यह तय किया जा सकेगा कि अतिरिक्त मजबूती, जल निकासी में सुधार या सड़क की निचली परतों में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं।

यात्रियों के लिए जरूरी सूचना

एक्सप्रेसवे पर मरम्मत के दौरान कुछ लेनों पर प्रतिबंध लगाए जाने की सूचना है। इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को यात्रा से पहले यातायात की ताजा स्थिति देखनी चाहिए और मौके पर लगाए गए संकेतों का पालन करना चाहिए।

निष्कर्ष: लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर दोबारा सड़क धंसने की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि संबंधित एजेंसियां सिर्फ मरम्मत तक सीमित न रहें, बल्कि तकनीकी जांच के जरिए समस्या की असली वजह सामने लाएं, ताकि भविष्य में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।

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