
SC-ST और OBC आयोग की तर्ज पर सवर्णों के लिए भी केंद्रीय आयोग बनाने की मांग, आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए आरक्षण की व्यवस्था पर भी जोर.उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सवर्ण आयोग के गठन की मांग ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कुछ सांसदों ने केंद्र सरकार के सामने सवर्णों के लिए अलग केंद्रीय आयोग बनाने की मांग उठाई है. इस मुद्दे को लेकर सांसदों ने कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात भी की है.हालांकि, आयोग की मांग को लेकर केंद्रीय मंत्रियों से मिलने वाले बीजेपी सांसदों के नाम अभी सामने नहीं आए हैं.उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. ऐसे में सवर्ण आयोग की मांग को आगामी चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि सवर्ण समाज के एक वर्ग में नाराजगी को दूर करने के लिए यह मुद्दा उठाया जा रहा है.बीजेपी सांसदों का तर्क है कि देश में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग-अलग आयोग मौजूद हैं. ऐसे में सवर्ण समाज के लिए भी केंद्रीय स्तर पर आयोग का गठन किया जाना चाहिए.सांसदों का कहना है कि सवर्ण समाज में भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े हैं. ऐसे लोगों के हितों की रक्षा के लिए सवर्ण आयोग जरूरी है. उनकी मांग है कि आर्थिक आधार पर पिछड़े सवर्णों को आरक्षण का लाभ देने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाए. सांसदों का यह भी कहना है कि सवर्ण समाज के साथ लंबे समय से चले आ रहे कथित अन्याय को दूर करने के लिए केंद्रीय स्तर पर एक आयोग बनाया जाना चाहिए.सवर्ण आयोग की मांग के समर्थन में बीजेपी सांसदों ने बिहार का उदाहरण भी दिया है. उनका तर्क है कि जब बिहार में सवर्ण आयोग का गठन किया जा चुका है, तो पूरे देश के लिए केंद्रीय स्तर पर ऐसा आयोग क्यों नहीं बनाया जा सकता?इसी मांग को लेकर बीजेपी के कुछ सांसदों ने केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की है.वहीं, इससे पहले अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद भी राष्ट्रपति के सामने सवर्ण आयोग के गठन की मांग उठा चुकी है. ऐसे में यूपी चुनाव से पहले यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है.


