Tuesday, November 3, 2026
Homeराज्यउत्तर प्रदेशजनवरी 2027 तक यूपी पंचायत चुनाव कराने की चुनौती लखनऊ में प्रदर्शन...

जनवरी 2027 तक यूपी पंचायत चुनाव कराने की चुनौती लखनऊ में प्रदर्शन से फिर गरमाया मुद्दा

यूपी पंचायत चुनाव पर बढ़ा दबाव, हाईकोर्ट की तीन महीने की समयसीमा के बीच लखनऊ में प्रदर्शन की खबर

स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने के निर्देश के बाद भी चुनाव कार्यक्रम और अधिसूचना को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में बेचैनी बनी हुई है। इसी मुद्दे पर 2 नवंबर को लखनऊ स्थित राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय के बाहर ग्रामीणों और उनके समर्थकों के प्रदर्शन की खबर सामने आई है। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव की तारीखों और अधिसूचना में देरी को लेकर सवाल उठाए और आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और मुख्य विधानसभा मार्ग पर यातायात प्रभावित होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या, प्रशासन की प्रतिक्रिया और यातायात बहाली के समय की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।

हाईकोर्ट ने तीन महीने में चुनाव कराने का दिया था निर्देश

पंचायत चुनाव को लेकर 14 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश दिया था। अदालत ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को चुनाव की तैयारियां तत्काल आगे बढ़ाने और उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव तीन महीने के भीतर पूरा कराने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी कहा था कि चुनाव मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत कराए जाएं। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी शामिल है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी समर्पित आयोग की जांच लंबित होने के आधार पर OBC आरक्षित सीटों को सामान्य सीटों में नहीं बदला जा सकता। Hindustan Times+1

तारीखों और अधिसूचना को लेकर क्यों बना हुआ है सस्पेंस

हाईकोर्ट के आदेश के बाद चुनाव प्रक्रिया की तैयारियों को आगे बढ़ाना राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार की जिम्मेदारी है। चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची, आरक्षण, चुनाव कार्यक्रम, कर्मचारियों की तैनाती, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना होगा।

राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंचायत चुनाव से जुड़ी तैयारियों के कुछ आदेश और सूचनाएं उपलब्ध हैं। इनमें अगस्त 2026 में जारी सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित निर्देश भी शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक पृष्ठ पर आम पंचायत चुनाव का पूरा कार्यक्रम और मतदान की तारीखें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं। SEC UP

यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव की समयसीमा और अधिसूचना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग भी चुनाव प्रक्रिया और तारीखों को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की बताई गई है।

OBC आरक्षण और चुनावी तैयारियां बनीं अहम चुनौती

पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग गठित किया है। हाईकोर्ट ने इस आयोग को अपना काम जारी रखने की अनुमति देते हुए चुनाव प्रक्रिया को उसके लंबित काम के कारण रोकने से मना किया है। अदालत ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। Hindustan Times+1

इसके साथ ही राज्य सरकार को चुनाव आयोग की जरूरत के अनुसार कर्मचारी, धनराशि, सुरक्षा और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने को कहा गया है। ऐसे में आने वाले समय में आरक्षण संबंधी तैयारियों और चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देना प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।

जनवरी 2027 तक चुनाव कराने की समयसीमा

14 अक्टूबर को आए हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तीन महीने की अवधि जनवरी 2027 के मध्य तक पूरी होती है। ऐसे में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को समय पर पूरा करने के लिए आयोग को जल्द कार्यक्रम जारी करना होगा।

लखनऊ में आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन की खबर ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अब ग्रामीणों की नजर राज्य निर्वाचन आयोग की अगली घोषणा पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना कब जारी होगी और हाईकोर्ट की तय समयसीमा के भीतर मतदान से लेकर निर्वाचित पंचायतों के गठन तक की प्रक्रिया कैसे पूरी की जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!