Friday, October 23, 2026
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1 नवंबर की महारैली से पहले यूपी कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन प्लान, हर जिले से कार्यकर्ता जुटाने की तैयारी तेज

INDIA गठबंधन की दिल्ली रैली के लिए अवध जोन में संगठन सक्रिय | SIR और वोटर लिस्ट का मुद्दा बनेगा आंदोलन का केंद्र | राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष की एकजुटता दिखाने की तैयारी

स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ। दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित INDIA गठबंधन की महारैली से पहले उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की रणनीति प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ताओं, युवाओं, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। लखनऊ में अवध जोन के नेताओं की बैठक में रैली को प्रभावी बनाने और संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

कांग्रेस इस रैली के जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपने विरोध को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रही है। ऐसे में 1 नवंबर की रैली विपक्ष के लिए राजनीतिक ताकत और एकजुटता दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

हर जिले और विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचने की तैयारी

उत्तर प्रदेश कांग्रेस की बैठक में अवध जोन के जिला और शहर अध्यक्षों, पदाधिकारियों तथा वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना रहा।

प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की योजना जिला, ब्लॉक और विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियां तय करके कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की है। पार्टी युवाओं, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के लोगों को भी अभियान से जोड़ना चाहती है, ताकि दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश की व्यापक भागीदारी दिखाई दे।

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने संगठन को दिया संदेश

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने रैली की तैयारियों के बीच संगठनात्मक एकजुटता और जनभागीदारी पर जोर दिया। पार्टी की रणनीति के तहत स्थानीय स्तर पर संपर्क अभियान चलाकर कार्यकर्ताओं को दिल्ली पहुंचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों को केवल राजनीतिक दलों तक सीमित रखने के बजाय आम मतदाताओं और सामाजिक संगठनों तक पहुंचाना जरूरी है।

राजेंद्र पाल गौतम ने बताया संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा

उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने रैली को संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा आंदोलन बताया। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की विपक्ष की मांग दोहराई।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में गड़बड़ियों की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों और मतदाता सूची से जुड़े दावों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर किया जाना जरूरी है।

इमरान मसूद ने SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। पार्टी नेताओं ने आशंका व्यक्त की कि इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और हर पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

विपक्ष इस मुद्दे को संसद, अदालत और सार्वजनिक मंचों पर उठाता रहा है। आगामी महारैली को इसी अभियान की अगली बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

दिल्ली पुलिस से मिल चुकी है रैली की अनुमति

दिल्ली पुलिस 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर चुकी है। पुलिस के मुताबिक, आयोजन के लिए 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक की अवधि निर्धारित की गई है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए संबंधित एजेंसियां आयोजकों के साथ समन्वय करेंगी।

INDIA गठबंधन की रैली में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों की भागीदारी की भी तैयारी है। गठबंधन के नेताओं की बैठक में रैली की रणनीति और आगे के आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की गई है।

1 नवंबर की रैली पर टिकी राजनीतिक निगाहें

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर संगठन को बूथ और जिला स्तर पर सक्रिय करना, तो दूसरी ओर दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना। पार्टी इसे मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, जबकि इस विषय पर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच राजनीतिक टकराव जारी है।

अब निगाहें 1 नवंबर की महारैली पर हैं। यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन कितनी बड़ी भागीदारी जुटा पाते हैं और SIR के मुद्दे पर उनका आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति में कितना प्रभाव डालता है।

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