
संजय निषाद का मुकेश सहनी पर तीखा हमला, बोले- ‘मौसमी नेताओं’ से मछुआरा समाज रहे सावधान
2027 से पहले यूपी में तेज हुई निषाद वोट की सियासत, गोंडा हत्याकांड के बाद दोनों नेताओं की बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद और मछुआरा समाज को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यूपी सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने बिहार के पूर्व मंत्री और विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला है। संजय निषाद ने कुछ नेताओं को ‘मौसमी नेता’ बताते हुए मछुआरा समाज से ऐसे नेताओं से सावधान रहने की अपील की।
संजय निषाद ने आरोप लगाया कि चुनावी मौसम आते ही कुछ नेता पैसों की गड्डियां लेकर समाज के बीच पहुंचते हैं और मछुआरा समाज को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज पैसों से खरीदा जाने वाला समाज नहीं है।
‘मछुआरा समाज बिकने वाली कौम नहीं’
संजय निषाद ने अपने बयान में कहा कि यूपी का मछुआरा समाज गरीब हो सकता है, लेकिन अपने राजनीतिक अधिकारों और सम्मान के प्रति जागरूक है। उन्होंने केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप समुदायों के बीच एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज को बांटने की कोशिशों से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें अलग-अलग नामों के जरिए समाज में विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही हैं। उनके मुताबिक, निषाद समाज को अपने राजनीतिक हितों और अधिकारों को लेकर एकजुट रहना चाहिए।
गोंडा के विनोद साहनी हत्याकांड के बाद गरमाई सियासत
संजय निषाद के ताजा हमले को गोंडा के निषाद समाज के कारोबारी विनोद साहनी की हत्या के बाद पैदा हुए राजनीतिक माहौल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इस मामले को लेकर संजय निषाद ने अपनी ही सरकार के खिलाफ गोंडा कलेक्ट्रेट में धरना दिया था। प्रशासन की कार्रवाई के आश्वासन के बाद उन्होंने प्रदर्शन समाप्त किया। मामले में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी और लापरवाही के आरोप में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
खास बात यह रही कि शुरुआती विरोध के दौरान संजय निषाद और मुकेश सहनी एक साथ भी नजर आए थे। दोनों ने विनोद साहनी के मामले में न्याय की मांग की थी। इसके बाद अब संजय निषाद का मुकेश सहनी पर यह राजनीतिक हमला चर्चा में है।
मुकेश सहनी पहले से यूपी में बढ़ा रहे सक्रियता
मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश में निषाद और मछुआरा समाज के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रही है। जून 2026 में सहनी ने यूपी में 101 दिनों की निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा निकालने का ऐलान किया था। इसका उद्देश्य समाज को एकजुट करने और आरक्षण समेत समुदाय से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक स्तर पर उठाना बताया गया था।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहनी की यूपी में सक्रियता निषाद पार्टी के लिए राजनीतिक चुनौती के तौर पर देखी जा रही है।
निषाद वोट को लेकर आमने-सामने दो राजनीतिक चेहरे
उत्तर प्रदेश की राजनीति में निषाद, मल्लाह, बिंद, केवट और कश्यप समुदायों को लेकर दोनों नेताओं की सक्रियता आने वाले चुनाव में अहम हो सकती है। एक तरफ संजय निषाद भाजपा के साथ गठबंधन में अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं, वहीं मुकेश सहनी यूपी में अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।
हाल के घटनाक्रम से यह साफ है कि 2027 से पहले निषाद वोट को लेकर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो चुकी है। गोंडा हत्याकांड के बाद दोनों नेताओं की सक्रियता और अब संजय निषाद के तीखे बयान ने इस मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है।


