Saturday, October 31, 2026
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13 हजार फॉर्म की गड़बड़ी फिर भी नई कुर्सी! पीलीभीत के दोनों SDM को मिली नई तैनाती

पीलीभीत वोटर लिस्ट मामले में FIR के बाद दोनों SDM को नई तैनाती, मयंक गोस्वामी चकबंदी और हेमंत चौधरी आपदा प्रबंधन में भेजे गए

स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ/पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद कार्रवाई की जद में आए दोनों एसडीएम को शासन ने नई जिम्मेदारी सौंप दी है। मयंक गोस्वामी को चकबंदी मुख्यालय, लखनऊ में बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) के पद पर संबद्ध किया गया है, जबकि हेमंत कुमार चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी (OSD) बनाया गया है।

दोनों अधिकारियों के तबादले ऐसे समय हुए हैं, जब पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में हजारों प्रविष्टियों में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग के निर्देश पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस घटनाक्रम ने चुनावी रिकॉर्ड की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

10,470 मतदाता रिकॉर्ड में मिलीं अनियमितताएं

जांच के अनुसार, 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता विवरण में बदलाव के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 की प्रविष्टियां दर्ज की गई थीं। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकृत और 3,309 अस्वीकृत किए गए। जांच में इन प्रविष्टियों से संबंधित जरूरी आवेदन और दस्तावेज कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिले। स्वीकृत 10,470 प्रविष्टियों को जांच में अनियमित पाया गया।

मामले में मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। अधिकारियों पर चुनावी रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और सरकारी जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही से जुड़े आरोप हैं। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

किस अधिकारी को कहां मिली तैनाती?

शासन की नई तबादला व्यवस्था के तहत मयंक गोस्वामी को चकबंदी मुख्यालय, लखनऊ में बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) के पद पर तैनात किया गया है। वहीं, हेमंत कुमार चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी बनाया गया है।

इसी फेरबदल में चकबंदी मुख्यालय में तैनात अजय कुमार को पीलीभीत का एसडीएम बनाया गया है, जबकि राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में ओएसडी रहे मांधाता प्रताप सिंह को भी पीलीभीत में एसडीएम की जिम्मेदारी दी गई है।

एफआईआर के बाद भी विभागीय जवाबदेही का सवाल

इस मामले में कार्रवाई केवल दोनों एसडीएम और कंप्यूटर ऑपरेटर तक सीमित नहीं रही है। चुनाव विभाग ने पीलीभीत के वर्तमान जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार और पूर्व जिला निर्वाचन अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह से भी मतदाता सूची की निगरानी और स्वीकृत प्रविष्टियों को लेकर जवाब मांगा है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के स्तर से मांगे गए स्पष्टीकरण का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि हजारों संदिग्ध प्रविष्टियां स्वीकृत होने के दौरान निगरानी व्यवस्था में कहां चूक हुई। प्रभावित मतदाता रिकॉर्ड की जांच और सुधार की प्रक्रिया भी इस मामले का अहम हिस्सा है।

अब जांच और जवाबदेही पर टिकी नजरें

पीलीभीत का यह मामला मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ा है। एक ओर दो एसडीएम को नई तैनाती दी गई है, दूसरी ओर एफआईआर और विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होगी और प्रभावित मतदाताओं के रिकॉर्ड को पूरी तरह दुरुस्त करने में कितना समय लगेगा।

फिलहाल नई तैनाती प्रशासनिक आदेश है, इसे एफआईआर या आरोपों से जुड़ी अंतिम कानूनी कार्रवाई नहीं माना जा सकता। मामले में जांच और आगे की विभागीय तथा कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

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