
कानपुर, 28 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अधिवक्ताओं ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन के आह्वान पर वकीलों ने कचहरी परिसर में धरना-प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान रजिस्ट्री कार्यालय का काम भी रुकवाया गया। हड़ताल के कारण अदालतों में नियमित कामकाज प्रभावित हुआ और अपने मुकदमों की सुनवाई के लिए पहुंचे कई लोगों को अगली तारीख लेकर लौटना पड़ा।
अधिवक्ता सुरक्षा कानून और पेंशन प्रमुख मांगें
वकीलों की प्रमुख मांगों में अधिवक्ता सुरक्षा कानून लागू करना और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के लिए पेंशन की व्यवस्था करना शामिल है। इसके अलावा नए अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता देने, अधिवक्ताओं के लिए न्यायालय परिसर में चैंबर की व्यवस्था करने और उनके मुकदमों को दूसरे जिलों में स्थानांतरित करने संबंधी फैसलों पर पुनर्विचार की मांग भी उठाई गई है।
अधिवक्ता संगठनों ने एडवोकेट्स एक्ट, 1961 में प्रस्तावित संशोधनों और न्यायिक अधिकारियों के आचरण से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए व्यवस्था बनाने जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। इन मांगों को लेकर सितंबर में आयोजित प्रदेश स्तरीय अधिवक्ता सम्मेलन में आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया था।
हर बुधवार न्यायिक कार्य से विरत रहने का फैसला
बार एसोसिएशन और लायर्स एसोसिएशन की ओर से लिए गए निर्णय के अनुसार, मांगें पूरी होने तक प्रत्येक बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने की घोषणा की गई थी। इसी क्रम में 28 अक्टूबर को भी अधिवक्ताओं ने कामकाज का बहिष्कार किया। दोनों संगठनों के महामंत्री बिनय कुमार मिश्रा और राजीव यादव ने संयुक्त रूप से बुधवार को न्यायिक कार्य से विरत रहने की बात कही थी।
जिला जज के नोटिस के बावजूद जारी है आंदोलन
इससे पहले न्यायिक कार्य के बहिष्कार और राष्ट्रीय लोक अदालत से जुड़े फैसले को लेकर जिला जज की ओर से दोनों अधिवक्ता संगठनों से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन जारी रखा है।
आम लोगों को उठानी पड़ रही परेशानी
हड़ताल का असर अदालतों में सुनवाई के लिए पहुंचे वादकारियों और कचहरी से जुड़े अन्य कामों पर पड़ा। दूर-दराज से आए लोगों को अगली तारीख लेकर लौटना पड़ा। कचहरी परिसर में फोटोकॉपी और स्टांप से जुड़ी दुकानों का काम भी प्रभावित होने की जानकारी है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि अधिवक्ताओं की मांगों पर शासन और संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं और आंदोलन को लेकर आगे क्या रणनीति तय होती है।


