
65 साल पुराने जमीन विवाद में KDA को बड़ी राहत! हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर लगाया 5 लाख का जुर्माना, 103 करोड़ की जमीन पर अहम फैसला
स्वराज इंडिया ब्यूरो/कानपुर। कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) से जुड़े करीब 65 साल पुराने जमीन विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सुमित मखीजा और एक अन्य याचिकाकर्ता की याचिका खारिज करते हुए उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। मामला कानपुर की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे अधिग्रहण से मुक्त कराने के लिए पहले सरकारी आदेश जारी हुआ था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया।
27 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में हाईकोर्ट ने माना कि जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कराने का आदेश महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया था। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा उस आदेश को वापस लेने की कार्रवाई को सही ठहराया। इस फैसले से KDA का पक्ष मजबूत हुआ है।
1959 में अधिग्रहण, फिर 2006 में जमीन मुक्त करने का आदेश
मामले की जड़ वर्ष 1959 तक जाती है, जब संबंधित जमीन का अधिग्रहण किया गया था। याचिकाकर्ताओं के पूर्वजों ने अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद वर्ष 1962 में जमीन खरीदी थी। बाद में जमीन को अधिग्रहण से मुक्त करने के लिए 3 मई 2006 को सरकारी अधिसूचना जारी की गई।
हालांकि, वर्ष 2008 में राज्य सरकार ने इस अधिसूचना को वापस ले लिया। इसी फैसले को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
तथ्यों को छिपाने पर अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जमीन को अधिग्रहण से मुक्त कराने की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने नहीं रखे गए थे। इनमें अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद जमीन खरीदे जाने और पहले से चल रही मुकदमेबाजी की जानकारी शामिल थी।
हाईकोर्ट ने माना कि महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर प्राप्त किया गया आदेश बरकरार नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने राज्य सरकार द्वारा 2006 की अधिसूचना वापस लेने के फैसले को सही माना और याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ताओं पर पांच लाख रुपये का जुर्माना
अदालत ने याचिकाकर्ताओं पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह राशि दो महीने के भीतर जमा करनी होगी। आदेश के अनुसार, जुर्माने की आधी रकम इलाहाबाद हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति को दी जाएगी। निर्धारित समय में रकम जमा नहीं होने पर इसकी वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह की जा सकती है।
103 करोड़ की जमीन पर क्या होगा आगे?
इस मामले में जमीन की कीमत करीब 103 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इस मूल्यांकन की आधिकारिक पुष्टि और KDA को वास्तविक कब्जा मिलने की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है। हाईकोर्ट के फैसले ने जमीन को अधिग्रहण से मुक्त करने वाले आदेश को वापस लेने की सरकारी कार्रवाई को बरकरार रखा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि KDA इस फैसले के बाद जमीन पर आगे क्या कदम उठाएगा और इतने वर्षों से चल रहे विवाद का जमीन पर वास्तविक असर कब दिखाई देगा?


