
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर मतगणना के दौरान सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाया। उनके बयान ‘भाजपाई वोट से नहीं, खोट से जीतते हैं’ ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर मतगणना को लेकर विवाद
गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी ने मतगणना प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव के बीच भी मुकाबला चर्चा में रहा। प्रत्याशियों की ओर से मतगणना के दौरान अनियमितताओं के आरोप लगाए गए, हालांकि इन आरोपों की पुष्टि और अंतिम निष्कर्ष के लिए निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मतों की संख्या में अंतर को लेकर भी सवाल उठे। ऐसे में मतगणना के आंकड़ों, आपत्तियों और उनके निस्तारण की आधिकारिक स्थिति पर सबकी नजर बनी रही।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर साधा निशाना
अखिलेश यादव ने अपने बयान में आरोप लगाया कि डॉ. संजयन त्रिपाठी के साथ मतगणना के दौरान अन्याय हुआ। उन्होंने भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी का सहारा लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षक समुदाय इस पूरे घटनाक्रम को याद रखेगा।
सपा अध्यक्ष ने शिक्षकों के सम्मान का मुद्दा उठाते हुए यह भी दावा किया कि इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है। उनके बयान का केंद्र चुनावी पारदर्शिता, शिक्षक समुदाय का सम्मान और भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल रहे।
हालांकि, अखिलेश यादव के आरोप राजनीतिक पक्ष की ओर से लगाए गए दावे हैं। इन्हें प्रमाणित निष्कर्ष मानने से पहले संबंधित चुनाव अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है।
11 सीटों के चुनाव में भाजपा और सपा के बीच मुकाबला
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 23 अक्टूबर को मतदान के बाद 27 अक्टूबर से मतगणना शुरू हुई। 28 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों में कुछ सीटों पर परिणाम घोषित होने और अन्य सीटों पर मतगणना अथवा परिणाम संबंधी गतिविधियां जारी रहने की जानकारी थी।
वाराणसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सपा के लाल बिहारी यादव की जीत की खबर सामने आई, जबकि भाजपा ने भी कई सीटों पर जीत दर्ज की। आगरा सहित कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में सपा प्रत्याशियों की स्थिति भी चर्चा में रही। अलग-अलग समय पर सामने आए रुझानों और परिणामों में अंतर संभव है, इसलिए प्रत्येक सीट की अंतिम स्थिति के लिए आधिकारिक घोषणा को ही आधार माना जाना चाहिए।
अब आगे क्या?
गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर उठे सवालों और अखिलेश यादव के बयान ने चुनावी पारदर्शिता को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतगणना संबंधी आपत्तियों पर निर्वाचन अधिकारी क्या स्पष्टीकरण देते हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड में विवादों की क्या स्थिति सामने आती है।
एक तरफ भाजपा की चुनावी उपलब्धियों का दावा है, तो दूसरी ओर सपा मतगणना की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है। इन दावों के बीच अंतिम तस्वीर आधिकारिक नतीजों और संबंधित शिकायतों पर होने वाली कार्रवाई से ही स्पष्ट होगी।


