
स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ। कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद श्रद्धा दुबे का सोशल मीडिया अकाउंट चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि उसके इंस्टाग्राम अकाउंट की फॉलोइंग संख्या में बदलाव हुआ है और फॉलोअर्स की संख्या भी बढ़ी है। इसी के बाद सवाल उठ रहा है कि जेल में रहने के दौरान अकाउंट पर गतिविधियां कौन कर रहा है।
14 लोगों को अनफॉलो करने का दावा
मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धा दुबे के अकाउंट की फॉलोइंग संख्या पहले 421 बताई गई थी, जो घटकर 407 होने का दावा किया जा रहा है। यानी 14 अकाउंट अनफॉलो किए जाने की बात सामने आई है। यह भी दावा है कि इनमें उत्तर प्रदेश सरकार से जुड़े कुछ वीआईपी शामिल हैं। हालांकि, इन आंकड़ों और संबंधित लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
1.41 लाख से 1.44 लाख तक पहुंचे फॉलोअर्स?
अकाउंट के फॉलोअर्स की संख्या में करीब तीन हजार की बढ़ोतरी का भी दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि घटना के समय फॉलोअर्स की संख्या लगभग 1.41 लाख थी, जो अब 1.44 लाख के आसपास बताई जा रही है। यदि आंकड़ों में बदलाव हुआ है, तो इसकी वजह जानने के लिए अकाउंट की गतिविधियों और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की जांच अहम हो सकती है।
सिर्फ फॉलोअर्स बढ़ने या कुछ अकाउंट अनफॉलो होने से यह साबित नहीं होता कि अकाउंट कोई दूसरा व्यक्ति चला रहा है। इसकी पुष्टि संबंधित डिजिटल साक्ष्यों और जांच से ही हो सकती है।
शिवा शर्मा मामले में क्या है ताजा स्थिति?
लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की 9 अक्टूबर को एक अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। उनकी मां की शिकायत के बाद मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और चालक तनवीर अली उर्फ दानिश को गिरफ्तार किया गया। अदालत ने तीनों को 31 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। 24 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों की जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी गई थीं। मामले की जांच जारी है। <Cite refs={[“turn139624search0″,”turn139624search1”]}/>
डिजिटल गतिविधियों की जांच क्यों अहम?
इस मामले में पुलिस पहले ही आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन और अन्य सामग्री को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज चुकी है। डिजिटल रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित डिवाइस और अकाउंट पर कब गतिविधियां हुईं। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों से इंस्टाग्राम अकाउंट में बताए गए बदलावों के पीछे किसी खास व्यक्ति की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अकाउंट की गतिविधियों के दावों की जांच में कोई ठोस डिजिटल सबूत सामने आता है। जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने तक किसी व्यक्ति को अकाउंट चलाने का जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी। शिवा शर्मा की मौत के मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।


