
स्वराज इंडिया ब्यूरो/नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने इस फैसले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के मौलिक अधिकारों के संदर्भ में चुनौती दी है। मामले में 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है।
दिल्ली पुलिस ने क्यों बदला प्रदर्शन स्थल?
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी आदेश के तहत जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया। इसके स्थान पर तीन वैकल्पिक स्थान निर्धारित किए गए हैं:
- रामलीला मैदान
- बुराड़ी मैदान
- पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान
पुलिस के आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किया गया। समिति को नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थलों पर विचार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाने हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों दायर हुई?
अधिवक्ता स्वाति सिंह की ओर से दायर याचिका में दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) का हवाला दिया गया है। ये प्रावधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने का अधिकार देते हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शनों को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन ऐसे प्रतिबंधों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का प्रभावी इस्तेमाल बाधित नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शन स्थल की दूरी और पहुंच भी अहम मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि विरोध-प्रदर्शन का उद्देश्य केवल एक जगह पर लोगों का इकट्ठा होना नहीं है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं सामने रखते हैं, असहमति व्यक्त करते हैं और संबंधित अधिकारियों तथा आम जनता का ध्यान महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर आकर्षित करते हैं।
याचिकाकर्ता के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल की संबंधित संस्थानों से दूरी, आम लोगों की पहुंच और प्रदर्शन की दृश्यता उसकी प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है। इसी आधार पर वैकल्पिक स्थलों की उपयुक्तता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
दिल्ली पुलिस ने क्या तर्क दिया?
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाईकोर्ट में बताया कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देश के बाद लिया गया। पुलिस के अनुसार, शीर्ष अदालत ने विरोध-प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थानों की पहचान करने की जरूरत पर जोर दिया था।
यह पक्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि विवाद केवल प्रदर्शन स्थल बदलने का नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन का भी है।
15 अक्टूबर की सुनवाई पर नजरें
अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर संभावित सुनवाई के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस फैसले को चुनौती देने वाली दलीलों पर किस तरह विचार करती है। फिलहाल याचिकाकर्ता की मांगों या अदालत के अंतिम रुख को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख स्थल रहा है। ऐसे में इस फैसले को लेकर कानूनी बहस का केंद्र यह है कि वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल निर्धारित करते समय नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और कानून-व्यवस्था की जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
डिस्क्लेमर: 15 अक्टूबर को सुनवाई संभावित है। अदालत की सुनवाई और किसी नए आदेश की पुष्टि के बाद खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।


