
कानपुर। शहर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर के संचालन और रखरखाव को लेकर महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के बीच विवाद गहरा गया है। करीब 96.10 करोड़ रुपये की लागत से बने इस सेंटर के टेंडर और एमओयू को लेकर दोनों पक्षों के रुख अलग-अलग हैं। महापौर ने कार्यकारिणी की बैठक में टेंडर निरस्त करने का फैसला होने की बात कही, जबकि नगर आयुक्त का कहना है कि कंपनी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और हैंडओवर की प्रक्रिया चल रही है। <Cite refs={[“turn901068view1″,”turn496726search1”]} />
9 अक्टूबर की बैठक में आमने-सामने आए महापौर और नगर आयुक्त
नगर निगम की कार्यकारिणी बैठक में महापौर प्रमिला पांडेय ने कन्वेंशन सेंटर के संचालन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतने महत्वपूर्ण मामले में सदन और कार्यकारिणी को विश्वास में लिया जाना चाहिए था।
महापौर ने सेंटर से होने वाली आय का ब्योरा भी मांगा। उन्होंने नगर निगम और स्मार्ट सिटी के बीच आय के 50-50 प्रतिशत बंटवारे की व्यवस्था का हवाला देते हुए पूछा कि आवश्यक स्वीकृतियों के बिना टेंडर की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी।
नगर आयुक्त का पक्ष भी साफ
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के मुताबिक, कन्वेंशन सेंटर के संचालन से संबंधित एमओयू और एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब हैंडओवर की औपचारिकताएं पूरी कराकर सेंटर का संचालन शुरू कराने की तैयारी है।
इस तरह एक तरफ महापौर टेंडर निरस्त करने के फैसले की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ नगर आयुक्त पहले से हुए समझौते के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इस मतभेद का अंतिम प्रशासनिक समाधान क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। <Cite refs={[“turn901068view1″,”turn496726search1”]} />
दो बार असफल रही प्रक्रिया, तीसरी बार हुआ टेंडर
रिपोर्टों के अनुसार, कन्वेंशन सेंटर के संचालन और रखरखाव के लिए पहले दो बार टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। इसके बाद तीसरी बार करीब चार करोड़ रुपये का टेंडर किया गया और श्री बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई।
यही प्रक्रिया अब विवाद का केंद्र बन गई है। सवाल टेंडर की प्रक्रिया, निर्णय लेने के अधिकार और सेंटर से होने वाली आय के हिसाब-किताब को लेकर उठ रहे हैं। <Cite refs={[“turn901068view1”]} />
मंगल भवन विवाद से पहले ही बढ़ी थी तल्खी
कन्वेंशन सेंटर से पहले बेनाझाबर स्थित ब्रजेंद्र स्वरूप पार्क के मंगल भवन की निगरानी और संचालन से जुड़ी समितियों को भंग किए जाने पर भी महापौर ने आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि इस संबंध में नगर निगम की कार्यकारिणी और सदन की स्वीकृति को उचित महत्व नहीं दिया गया।
9 अक्टूबर की बैठक में कन्वेंशन सेंटर के साथ अन्य प्रशासनिक फैसलों पर भी सवाल उठे। इसके बाद नगर निगम में निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के अधिकारों को लेकर बहस और तेज हो गई।
क्या कहता है नगर आयुक्त और महापौर के अधिकारों का विवाद
11 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, नगर आयुक्त ने यह रुख भी रखा कि शासन स्तर पर लिए गए फैसलों को कार्यकारिणी या सदन अपने स्तर पर नहीं बदल सकता। वहीं, महापौर का जोर है कि नगर निगम से जुड़े बड़े फैसलों में सदन और कार्यकारिणी को विश्वास में लिया जाना चाहिए।
इस विवाद का समाधान संबंधित शासनादेशों, समझौतों और नगर निगम के लागू नियमों के आधार पर ही स्पष्ट होगा। फिलहाल इसे किसी एक पक्ष की अंतिम जीत या हार कहना जल्दबाजी होगी। <Cite refs={[“turn901068view0″,”turn496726search10”]} />
कारोबार को बढ़ावा देने की क्षमता रखता है कन्वेंशन सेंटर
करीब 96.10 करोड़ रुपये की लागत से तैयार कन्वेंशन सेंटर का उद्देश्य कानपुर में बड़े कारोबारी आयोजन, प्रदर्शनियां, व्यापारिक सम्मेलन और निवेश से जुड़ी बैठकें आयोजित करने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे स्थानीय उद्यमियों को अपने उत्पादों और सेवाओं को व्यापक बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है। <Cite refs={[“turn901068view2”]} />
परिसर में 16 हजार और 12 हजार वर्गफुट के दो प्रदर्शनी हॉल, 300 लोगों की क्षमता वाला कॉन्फ्रेंस हॉल और 100-100 लोगों के बैठने की क्षमता वाले तीन मीटिंग रूम होने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा छह अतिथि कमरे, दो लग्जरी सुइट, आठ हजार वर्गफुट का फूड कोर्ट और 68 वाहनों की क्षमता वाली कवर्ड पार्किंग भी उपलब्ध कराई गई है।
इन सुविधाओं का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब सेंटर का नियमित संचालन शुरू होगा और यहां कारोबारी आयोजन होने लगेंगे।
शहर के विकास पर भी उठे सवाल
कानपुर नगर निगम में लगातार सामने आ रहे मतभेदों के बीच शहर की नागरिक सुविधाओं पर ध्यान बनाए रखना भी जरूरी है। सड़क, जलभराव, सफाई और अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान के साथ इस महत्वपूर्ण परियोजना का संचालन भी आगे बढ़ना चाहिए।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि एमओयू और टेंडर को लेकर उठे विवाद का निपटारा किस तरह होता है और कन्वेंशन सेंटर आम कारोबारियों के लिए कब पूरी तरह उपलब्ध हो पाता है।


