
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के 11 विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त याचिका दाखिल की है। याचिका में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है।
इस कानूनी कदम के जरिए विपक्ष ने निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक समीक्षा की मांग की है। याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सहित चुनाव आयोग के अन्य अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है।
राहुल गांधी की अगुवाई में 11 नेताओं ने दाखिल की याचिका
12 अक्टूबर को दाखिल इस याचिका में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल हैं।
याचिका दाखिल करने वाले 11 नेताओं में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, सीपीआई के डी राजा, सीपीआई (एम) के एमए बेबी, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माझी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी बनाया गया है।
SIR में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम काटने पर सवाल
विपक्ष की याचिका का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाताओं के नाम हटाने और चुनाव आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।
विपक्ष का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम अनुचित तरीके से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। इसके लिए नाम हटाने के कारणों का खुलासा, संबंधित रिकॉर्ड की उपलब्धता और प्रभावित मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष और अदालत का अंतिम निर्णय महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल, आरोपों को न्यायिक रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई?
याचिका में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग के निर्णयों से संबंधित कई राहतों की मांग की गई है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
- नाम हटाने के फैसलों से जुड़े रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं तथा अदालत के समक्ष पेश किए जाएं।
- मतदाता सूची में नाम हटाने के कारणों और संबंधित आंकड़ों को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने की व्यवस्था हो।
- पात्र मतदाताओं के नाम बहाल कराने के लिए प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- पात्र मतदाता को उचित सूचना और सुनवाई का अवसर दिए बिना उसका नाम हटाने से सुरक्षा प्रदान की जाए।
- पुनरीक्षण प्रक्रिया की वैधानिकता और चुनाव आयोग के अधिकारों के इस्तेमाल की न्यायिक समीक्षा की जाए।
- याचिकाकर्ताओं की मांग के अनुसार, विवादित SIR प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने सहित उचित निर्देश दिए जाएं।
इन मांगों पर क्या आदेश दिया जाएगा, यह सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार भी याचिका में प्रतिवादी
इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी बनाया गया है। विपक्ष ने आयोग के निर्णय लेने की प्रक्रिया और संवैधानिक अधिकारों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि संबंधित रिकॉर्ड और निर्णयों की जांच की जाए, ताकि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधानिकता पर उठे सवालों का न्यायिक परीक्षण हो सके।
CJI से मुलाकात की मांग के बाद अदालत पहुंचा विपक्ष
इस घटनाक्रम से पहले राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत से मुलाकात के लिए समय मांगा था। विपक्ष इस मुद्दे पर अपनी चिंताएं और मांगें अदालत के सामने रखना चाहता था।
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने संबंधित मामलों के न्यायालय में लंबित होने का हवाला देते हुए नेताओं को उचित न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की बात कही। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने का रास्ता अपनाया।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब अदालत तक पहुंच चुका है। विपक्ष जहां मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं इस मामले में चुनाव आयोग का जवाब और अदालत की टिप्पणियां आगे की दिशा तय करने में अहम होंगी।
12 अक्टूबर की देर शाम तक सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका पर 13 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना जताई गई थी। सुनवाई की वास्तविक स्थिति और किसी भी अंतरिम आदेश की पुष्टि अदालत की आधिकारिक कार्यवाही से की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूची के पुनरीक्षण, कथित अनियमितताओं और पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े इन सवालों पर क्या रुख अपनाता है।


