
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन की जगह बदलने से जनता की आवाज और जन-जागरण को नहीं रोका जा सकता। उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाते रहने का संदेश दिया।
डिंपल यादव बोलीं—हर चौपाल और नुक्कड़ बनेगा जंतर-मंतर
डिंपल यादव ने अपने बयान में कहा कि यदि सरकार यह सोचती है कि किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाकर आम लोगों की न्याय की मांग दबाई जा सकती है, तो यह उसकी भूल है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज किसी एक मैदान या शहर तक सीमित नहीं है।
सपा सांसद ने वोटर लिस्ट, महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सवालों पर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना जरूरी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हर चौपाल, हर नुक्कड़, हर सड़क, हर गांव और हर घर जन-जागरण का केंद्र बन सकता है।
जंतर-मंतर की जगह अब कहां होंगे प्रदर्शन
दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की जानकारी दी। पुलिस आयुक्त अनूराग कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब प्रदर्शन और धरने के लिए तीन स्थान निर्धारित किए गए हैं—रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड। यह बदलाव केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर किया गया है। नए स्थलों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया अलग से जारी की जानी है।
जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न जन आंदोलनों के लिए प्रमुख प्रदर्शन स्थल रहा है। ऐसे में इसके निर्धारित स्थल का दर्जा हटाए जाने के फैसले पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस शुरू हो गई है।
अखिलेश यादव ने भी चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मतदाता सूची को लेकर चुनाव आयोग पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में फर्जी वोट बनवाए जा रहे हैं और इस प्रक्रिया से भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंच सकता है। ये अखिलेश यादव के राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने और गलत प्रविष्टियों को रोकने का मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में है। ऐसे मामलों में आरोपों की जांच और संबंधित संस्थाओं की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
प्रदर्शन के अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था पर बहस
जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला एक ओर राजधानी में प्रदर्शन के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर इसने शांतिपूर्ण विरोध के लिए उपयुक्त स्थानों और नागरिकों की लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर बहस तेज कर दी है।
डिंपल यादव के बयान और अखिलेश यादव के आरोपों से साफ है कि समाजवादी पार्टी ने प्रदर्शन के अधिकार और मतदाता सूची के मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी है। अब इस फैसले पर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।


