Wednesday, September 30, 2026
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कानपुर में अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष का शुभारंभ, चंपत राय ने याद किया राम जन्मभूमि आंदोलन में योगदान

स्वराज इंडिया ब्यूरो/कानपुर। विश्व हिंदू परिषद की ओर से पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष का कानपुर में शुभारंभ किया गया। बेनाझाबर स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में आयोजित समारोह में विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

समारोह की अध्यक्षता लोहिया कॉर्प लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजकुमार लोहिया ने की। कार्यक्रम में संतों, विहिप पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने अशोक सिंघल के सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक योगदान को याद किया।

चंपत राय ने सुनाए अशोक सिंघल के कार्यों से जुड़े प्रसंग

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चंपत राय ने अशोक सिंघल के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली को याद किया। उन्होंने कहा कि सिंघल के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा थी और किसी काम को हाथ में लेने के बाद उसकी योजना पर गंभीरता से काम करते थे। उनके मुताबिक इसी संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें कई महत्वपूर्ण अभियानों को आगे बढ़ाने में मदद की।

चंपत राय ने विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंघल ने राम मंदिर के मुद्दे को व्यापक स्तर तक पहुंचाने और संत समाज को एक मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संतों को एक मंच पर लाने की कोशिश का किया जिक्र

चंपत राय ने अपने संबोधन में धर्म संसद और संत सम्मेलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल ने अलग-अलग संत परंपराओं को साथ लाने का प्रयास किया और सामाजिक समरसता को लेकर भी काम किया।

उन्होंने काशी की धर्म संसद में डोम राजा को मंच पर लाए जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सिंघल के लिए सामाजिक समरसता केवल भाषण का विषय नहीं थी, बल्कि वह इसे व्यवहार में उतारने का प्रयास करते थे। यह प्रसंग हाल की उनकी कानपुर यात्रा पर प्रकाशित रिपोर्टों में भी दर्ज है।

पंजाब आतंकवाद के दौर का भी किया जिक्र

चंपत राय ने अपने संबोधन में पंजाब में आतंकवाद के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय अशोक सिंघल ने समाज का मनोबल बनाए रखने के लिए संतों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर यात्राएं और कार्यक्रम किए।

उन्होंने हरिद्वार से पंजाब तक निकाली गई संत यात्रा का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे प्रयासों का उद्देश्य समाज में एकजुटता और विश्वास बनाए रखना था।

अयोध्या गोलीकांड के बाद की घटना सुनाई

चंपत राय ने अयोध्या गोलीकांड के बाद अशोक सिंघल से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद सिंघल काफी व्यथित थे और लंबे समय तक बेचैन रहे।

चंपत राय के अनुसार, उस दौरान सिंघल ने अपने एक कार्यकर्ता से श्मशान घाट जाने और वहां से चिता की राख लाने को कहा था। उन्होंने बताया कि कार्यकर्ता राख लेकर आया, जिसे सिंघल ने अपने सिरहाने रख लिया।

यह प्रसंग चंपत राय द्वारा मंच से सुनाया गया संस्मरण है; इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के बजाय उनके कथन के रूप में प्रस्तुत किया जाना उचित है।

जन्मशताब्दी वर्ष में सालभर होंगे कार्यक्रम

विहिप कानपुर प्रांत ने अशोक सिंघल की जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान अगले एक साल तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इनमें विचार गोष्ठियां, धर्मसभाएं, समरसता सम्मेलन, युवा संवाद और अशोक सिंघल के जीवन पर आधारित प्रदर्शनियां शामिल हैं। संगठन ने कानपुर प्रांत के 21 जिलों में इन गतिविधियों को आयोजित करने की बात कही है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी विहिप ने जन्मशताब्दी वर्ष के दौरान देश-विदेश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने की योजना घोषित की है। 27 सितंबर को नई दिल्ली में जन्मशताब्दी समारोह के राष्ट्रीय उद्घाटन कार्यक्रम को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संबोधित किया था।

कानपुर के कार्यक्रम में वक्ताओं ने अशोक सिंघल के जीवन, संगठनात्मक कार्य, संत समाज से संवाद और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े उनके योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत पर चर्चा की।

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