
स्वराज इंडिया ब्यूरो/आगरा। मलपुरा थाना क्षेत्र के धनौली इलाके में औषधि विभाग और पुलिस की कार्रवाई से दवा कारोबार को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। तीन छतरी के पास, मदर आरडी स्कूल के पीछे एक खंडहरनुमा कमरे में दवाओं के कथित अवैध भंडारण और पैकिंग की सूचना पर एफएसडीए की टीम ने छापा मारकर दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत का दवा स्टॉक कब्जे में लिया है। मौके पर दवाओं की पैकिंग कर रहे एक युवक को हिरासत में लिया गया है।
12 घंटे की निगरानी के बाद हुई कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक औषधि विभाग की टीम ने संदिग्ध ठिकाने पर करीब 12 घंटे तक निगरानी रखी। मंगलवार सुबह करीब नौ बजे टीम को कमरे में गतिविधि दिखाई दी, जिसके बाद पुलिस की मदद से मौके पर पहुंचकर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान कमरे में दवाओं की बड़ी संख्या में पेटियां मिलीं। प्रारंभिक आकलन में इनकी कीमत दो करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

कई नामी दवाओं का स्टॉक मिलने की बात
कार्रवाई के दौरान केटोरॉल, कार्डेस, एलेग्रा, एलेग्रा-एम, लोसर-एच और जुलरा समेत विभिन्न दवाओं की पेटियां मिलने की जानकारी सामने आई है। विभाग अब इन दवाओं के स्रोत, खरीद-बिक्री और भंडारण से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है।
नकली होने की अभी जांच जारी
बरामद दवाओं को लेकर नकली या संदिग्ध होने की आशंका जताई गई है, लेकिन सभी दवाओं के नकली होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। विभाग दवाओं के बैच नंबर, पैकिंग, निर्माण एवं एक्सपायरी विवरण के साथ उनके नमूनों की जांच कर रहा है। अंतिम स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
रिहायशी इलाके में इतना बड़ा स्टॉक कैसे पहुंचा
कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी इलाके के एक कमरे में इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण किसके निर्देश पर किया जा रहा था। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवाएं किस फर्म या व्यक्ति से खरीदी गईं, इनके लिए कौन से दस्तावेज इस्तेमाल हुए और इनकी आगे आपूर्ति कहां की जानी थी।

पैकिंग का काम मौके पर क्यों और किस अनुमति के तहत किया जा रहा था, यह भी जांच का अहम हिस्सा है।
फिरोजाबाद और हाथरस की टीमें भी पहुंचीं
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ स्थित विभागीय अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद फिरोजाबाद और हाथरस से औषधि विभाग की टीमें भी मौके पर पहुंचीं। संयुक्त टीम ने बरामद स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। हिरासत में लिए गए युवक से भी पूछताछ की जा रही है।
आगरा में पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े दवा भंडारण मामले
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब आगरा में इस साल नकली, अवैध और अनधिकृत दवाओं के खिलाफ कई बड़े अभियान चल चुके हैं। इससे पहले एफएसडीए की कार्रवाइयों में करोड़ों रुपये की दवाएं जब्त करने, अवैध गोदाम सील करने और एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई सामने आ चुकी है। जुलाई की एक कार्रवाई में विभाग ने 58 थोक मेडिकल फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए जाने और कई नमूने जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी दी थी।
फिलहाल धनौली मामले में जांच जारी है। दवाओं की गुणवत्ता, उनके स्रोत और भंडारण की वैधता से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और आगे किस स्तर की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


