
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ लखनऊ
उत्तर प्रदेश में हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी रेस्टोरेंट, कैफे या अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठान ग्राहकों को हुक्का सर्विस नहीं दे सकते। अदालत ने हुक्का बार चलाने से जुड़ी याचिकाओं को खारिज करते हुए मौजूदा तंबाकू नियंत्रण नियमों को लागू करने पर जोर दिया है।
2017 के संशोधन का कोर्ट ने दिया हवाला
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अभ्देश कुमार चौधरी की पीठ ने हुक्का बार और रेस्टोरेंट में हुक्का सर्विस से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की।
अदालत ने सिगरेट्स एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट, 2003 (COTPA) और Prohibition of Smoking in Public Places Rules, 2008 का हवाला देते हुए कहा कि निर्धारित स्मोकिंग एरिया सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंध का सीमित अपवाद है। इसका मतलब यह नहीं है कि उस जगह किसी तरह की हुक्का सर्विस शुरू की जा सकती है।
कोर्ट ने खास तौर पर 2017 में नियमों में किए गए संशोधन का उल्लेख किया, जिसके बाद स्मोकिंग एरिया में किसी भी प्रकार की सर्विस देने पर रोक का दायरा स्पष्ट हुआ।
तैयार करके हुक्का देने की दलील भी खारिज
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि रेस्टोरेंट हुक्का सर्विस नहीं करेगा, बल्कि हुक्का तैयार करके ग्राहक को दे दिया जाएगा और इसके बाद ग्राहक खुद उसका इस्तेमाल करेगा।
हाई कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत के अनुसार हुक्का तैयार करने की प्रक्रिया में उपकरण को तैयार करना, तंबाकू भरना, पानी डालना, कोयला लगाना और जरूरत पड़ने पर कोयला बदलना जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। अदालत ने इन गतिविधियों को केवल ग्राहक की ओर से की जाने वाली सेल्फ सर्विस नहीं माना।
हुक्का किराये पर देने की दलील भी नहीं चली
याचिकाकर्ताओं ने हुक्का उपकरण को किराये पर देने का विकल्प भी अदालत के सामने रखा। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज करते हुए कहा कि केवल इसे किराये का उपकरण बताने से गतिविधि की कानूनी प्रकृति नहीं बदल जाती।
अदालत के अनुसार हुक्का तैयार करने और उसे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में प्रतिष्ठान की भूमिका बनी रहती है, इसलिए इसे प्रतिबंधित सेवा के दायरे से बाहर नहीं किया जा सकता।
स्वच्छ हवा के अधिकार पर कोर्ट की टिप्पणी
फैसले में अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार और अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत कारोबार करने के अधिकार के बीच संतुलन पर भी टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार को ऐसे कारोबारी हितों के आधार पर सीमित नहीं किया जा सकता, जो कानून के तहत प्रतिबंधित गतिविधि से जुड़े हों।
हुक्का बार के लिए अलग लाइसेंस का भी सवाल
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार संचालित करने की अनुमति देने वाला अलग लाइसेंस जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
वहीं, कोर्ट ने COTPA के तहत पुलिस की कार्रवाई की शक्तियों को भी रेखांकित किया है। इसमें कानून के उल्लंघन की स्थिति में तलाशी, सामान जब्त करने और दंडात्मक कार्रवाई जैसी शक्तियां शामिल हैं।
मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजा जाएगा फैसला
अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि आवश्यक अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट या अन्य प्रतिष्ठानों के लिए केवल स्मोकिंग एरिया बना लेने के आधार पर हुक्का सर्विस जारी रखने की गुंजाइश नहीं रह गई है।
क्या बदला?
स्मोकिंग एरिया: हुक्का सर्विस की अनुमति नहीं
रेडी हुक्का ग्राहक को देना: इसे भी सर्विस माना जा सकता है
हुक्का किराये पर देना: कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की
अलग हुक्का बार लाइसेंस: संबंधित विभागों के पास ऐसा लाइसेंस जारी करने की शक्ति नहीं
पुलिस कार्रवाई: COTPA के तहत कार्रवाई की शक्तियां बरकरार


