Monday, September 28, 2026
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जल जीवन मिशन की टंकियों पर ED की नजर, मंजूरी से भुगतान तक खंगाला जा रहा पूरा हिसाब

स्वराज इंडिया ब्यूरो/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकियों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने जांच का दायरा बढ़ाया है। एजेंसी ने ऐसी टंकियों से संबंधित रिकॉर्ड मांगा है, जो निर्माण या कमीशनिंग के बाद ढह गईं, उनमें रिसाव या दरारें आईं, झुक गईं, धंस गईं या जिन्हें असुरक्षित अथवा अनुपयोगी घोषित किया गया। रिपोर्टों के मुताबिक जांच का फोकस टंकी की मंजूरी से लेकर निर्माण, गुणवत्ता जांच और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पर है।

2019 से अब तक की टंकियों का मांगा गया ब्योरा

रिपोर्ट के अनुसार ED की लखनऊ इकाई ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से वर्ष 2019 से अब तक ऐसी टंकियों का विवरण मांगा है। इसमें टंकी के निर्माण की स्थिति के साथ यह भी देखा जा रहा है कि उसके निर्माण और भुगतान की प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर स्वीकृति दी गई थी।

जांच में उन टंकियों को भी शामिल किया गया है जिनमें निर्माण के दौरान या बाद में तकनीकी समस्या सामने आई। इसके साथ ही मरम्मत या दोबारा निर्माण कराई गई संरचनाओं का रिकॉर्ड भी मांगे जाने की बात सामने आई है।

DPR से लेकर स्ट्रक्चरल डिजाइन तक की पड़ताल

ED की पूछताछ केवल टंकी बनने और भुगतान तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति, निविदा प्रक्रिया, DPR, स्वीकृत स्ट्रक्चरल डिजाइन और ड्रॉइंग जैसे दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं।

इसके अलावा निर्माण से पहले जारी किए गए संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र, मृदा परीक्षण, मिक्स डिजाइन रिपोर्ट और तृतीय-पक्ष निरीक्षण से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी और गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था या नहीं।

ठेकेदार से लेकर बैंक भुगतान तक रिकॉर्ड

रिपोर्ट के मुताबिक ED ने ठेकेदारों और संबंधित एजेंसियों से जुड़े भुगतान रिकॉर्ड पर भी जानकारी मांगी है। इसमें रनिंग अकाउंट बिल और अंतिम बिल के अलावा भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि भुगतान जारी करने से पहले संबंधित संरचना की गुणवत्ता और सुरक्षा का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था। संबंधित अभियंताओं और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड भी इसी क्रम में देखे जा सकते हैं।

पोर्टल पर अपलोड तस्वीरें भी जांच के दायरे में

जल जीवन मिशन की योजनाओं की प्रगति और पूर्णता से जुड़ी तस्वीरें तथा डिजिटल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ED यह भी देख रही है कि किसी योजना को पूरा दिखाने के लिए किस तरह की रिपोर्टिंग और दस्तावेज उपलब्ध कराए गए थे।

टंकी में खराबी सामने आने के बाद संबंधित इंजीनियरों, ठेकेदारों या थर्ड-पार्टी एजेंसियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी मांगे जाने की बात सामने आई है।

2021 में हुआ था जल निगम का विभाजन

उत्तर प्रदेश में जल निगम को ग्रामीण और नगरीय हिस्सों में अलग करने की प्रक्रिया 2021 में हुई थी। इसके बाद जल जीवन मिशन से जुड़ी ग्रामीण योजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) महत्वपूर्ण कार्यान्वयन संस्था के रूप में सामने आया।

UP जल निगम (ग्रामीण) के आधिकारिक पोर्टल पर 2026 में जल जीवन मिशन की निगरानी, वित्तीय स्वीकृतियों और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित कई शासनादेश दर्ज हैं। जुलाई 2026 में भी योजनाओं के प्रभावी अनुश्रवण से संबंधित शासनादेश जारी किया गया था।

जांच का मतलब अभी आरोप साबित होना नहीं

ED द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार या कंपनी दोषी साबित हो गई है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एजेंसी निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता, स्वीकृति और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि किसी विशेष योजना या भुगतान में नियमों का उल्लंघन, वित्तीय अनियमितता या अन्य कानूनी गड़बड़ी पाई जाती है या नहीं।

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पाइप के जरिए सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में टंकियों और जलापूर्ति ढांचे की गुणवत्ता सीधे योजना की प्रभावशीलता से जुड़ी है। UP जल निगम (ग्रामीण) के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी योजनाओं की निगरानी और दीर्घकालिक स्थायित्व पर लगातार जोर दिया गया है।

फिलहाल ED की जांच में सबसे अहम सवाल यही है कि जिन टंकियों में निर्माण या गुणवत्ता संबंधी समस्याएं सामने आईं, उनकी मंजूरी से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड क्या बताते हैं।

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