सुबह 6 बजे से लाइन में लगी महिला ने लगाया आरोप नंबर आने के बाद दस्तावेजों के नाम पर रोका गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा

स्वराज इंडिया ब्यूरो/कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध हैलेट अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था के बीच अल्ट्रासाउंड विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। एक महिला तीमारदार ने विभागीय कर्मचारियों पर कथित अभद्र व्यवहार करने और दस्तावेजों के नाम पर जांच के लिए परेशान करने के आरोप लगाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने का दावा किया जा रहा है

सुबह 6 बजे से अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन में लगी महिला
जानकारी के अनुसार नीलम सिंह की पुत्री का इलाज चिल्ड्रेन अस्पताल में डॉ ए के आर्या के अधीन चल रहा है। पुत्री की आवश्यक जांच के लिए नीलम सिंह सुबह करीब 6 बजे हैलेट अस्पताल के अल्ट्रासाउंड विभाग के बाहर पहुंचीं और अपनी बारी का इंतजार करने लगीं
महिला के मुताबिक करीब 9 बजे उनका नंबर आया लेकिन इसी दौरान विभागीय कर्मचारियों की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि आवश्यक दस्तावेजों में हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और इसी आधार पर अल्ट्रासाउंड जांच करने से रोक दिया गया
दस्तावेज पूरे होने के बावजूद परेशान करने का आरोप
महिला का कहना है कि मरीज के भर्ती होने से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और अन्य औपचारिकताएं पहले ही पूरी की जा चुकी थीं। ऐसे में जांच के समय अतिरिक्त दस्तावेज या हस्ताक्षर की आवश्यकता क्यों बताई गई इसे लेकर उन्होंने सवाल उठाए
महिला और कर्मचारियों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। हालांकि वीडियो और लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है

अभद्र व्यवहार के आरोप से भी उठे सवाल
महिला तीमारदार ने विभागीय कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि जांच कराने के लिए पहुंचने के बावजूद उन्हें उचित तरीके से समझाने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया
यदि किसी मरीज या तीमारदार को दस्तावेजों की कमी के कारण जांच से रोका जाता है तो अस्पताल की ओर से निर्धारित प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराना जरूरी है ताकि मरीजों को बार बार परेशान न होना पड़े
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद देरी का सवाल
मामला प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ सौरभ अग्रवाल के कार्यालय के नजदीक का बताया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन के सामने यह सवाल भी है कि यदि मरीज के उपचार से जुड़े आवश्यक दस्तावेज पहले ही स्वीकार किए जा चुके थे तो अल्ट्रासाउंड जांच के समय कौन सी औपचारिकता लंबित थी
महिला की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशों के बावजूद विभागीय स्तर पर मरीजों को कथित रूप से परेशान किया जाता है हालांकि इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है

भ्रष्टाचार के आरोपों की भी हो निष्पक्ष जांच
अल्ट्रासाउंड विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों के बीच कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली जैसे आरोप भी चर्चा में हैं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है
ऐसे में अस्पताल प्रशासन के लिए जरूरी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि मरीज की जांच में देरी किस वजह से हुई थी तथा क्या विभागीय कर्मचारियों की ओर से निर्धारित नियमों का पालन किया गया था
प्रधानाचार्य की सुधार कवायद के बीच विभाग पर सवाल
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ संजय काला की ओर से अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की कवायद की जा रही है। ऐसे में किसी विभाग के कर्मचारियों के कथित व्यवहार को लेकर सामने आया मामला संस्थान की कार्यप्रणाली और मरीजों के अनुभव दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है
अस्पताल प्रशासन को अल्ट्रासाउंड विभाग में मरीजों की प्रतीक्षा व्यवस्था दस्तावेजों की आवश्यकता जांच की प्रक्रिया और संबंधित नियमों को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करना चाहिए ताकि मरीजों और तीमारदारों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके
जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और महिला तीमारदार की शिकायत के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। जांच में यदि मरीज को अनावश्यक रूप से रोकने अभद्र व्यवहार करने या किसी तरह की अवैध वसूली के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए
वहीं यदि दस्तावेजों से जुड़ी कोई अनिवार्य प्रक्रिया लंबित थी तो अस्पताल प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए ताकि मामले को लेकर बनी स्थिति साफ हो सके


