Wednesday, September 9, 2026
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सत्य निकेतन हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, MCD और DU को भी ठहराया जिम्मेदार; 10 दिन में मांगा जवाब

स्वराज इंडिया ब्यूरो/दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की दर्दनाक घटना को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) को नोटिस जारी किया है. अदालत ने कहा कि हादसे की जिम्मेदारी केवल इमारत के मालिक तक सीमित नहीं है, बल्कि MCD और दिल्ली विश्वविद्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं.चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने दिल्ली विश्वविद्यालय समेत दूसरे कॉलेजों के छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है.हाईकोर्ट ने MCD से पूछा है कि दिल्ली में PG और हॉस्टल को लेकर क्या नियम और रेगुलेशन लागू हैं. अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सत्य निकेतन में गिरी इमारत सभी जरूरी मंजूरियां हासिल करने के बाद बनाई गई थी या नहीं. चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने दिल्ली विश्वविद्यालय समेत दूसरे कॉलेजों के छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है. हाईकोर्ट ने MCD से पूछा है कि दिल्ली में PG और हॉस्टल को लेकर क्या नियम और रेगुलेशन लागू हैं. अदालत ने यह भी जानना चाहा कि सत्य निकेतन में गिरी इमारत सभी जरूरी मंजूरियां हासिल करने के बाद बनाई गई थी या नहीं.MCD को दिल्ली में संचालित सभी PG हॉस्टलों की इमारतों को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है. रिपोर्ट में यह जानकारी देने को कहा गया है कि इमारतें कानूनी रूप से बनी हैं या नहीं और उनमें कितने छात्र रह रहे हैं.अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय से भी कई अहम सवाल पूछे हैं. DU को बताना होगा कि विश्वविद्यालय में हर साल कितने छात्र दाखिला लेते हैं और उनमें से कितने छात्रों को हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों के लिए DU और सरकार की ओर से कितने हॉस्टल उपलब्ध हैं. अदालत का मानना है कि हॉस्टल की कमी के कारण बड़ी संख्या में छात्र निजी PG में रहने को मजबूर होते हैं. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि MCD की जिम्मेदारी है कि इमारतों का निर्माण और उनकी मरम्मत तय नियमों के मुताबिक हो. कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई होती तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था. अदालत ने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती. कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में लगातार सामने आने वाली ऐसी घटनाओं पर भी चिंता जताई और दिल्ली सरकार से पूछा कि इस तरह की त्रासदियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. सभी संबंधित विभागों को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल कर जवाब देने का निर्देश दिया गया है.हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन में गिरी इमारत के मलबे में फंसे छात्रों को बचाने के प्रयास और तेज करने का निर्देश दिया है. केंद्र सरकार, MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि बचाव अभियान पूरी गंभीरता के साथ चलाया जा रहा है और सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं.तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ित परिवारों के दर्द को समझना बेहद मुश्किल है. उन्होंने सोशल मीडिया पर हादसे से जुड़े संवेदनशील वीडियो साझा किए जाने का मुद्दा भी उठाया.सॉलिसिटर जनरल ने अदालत से अनुरोध किया कि घायल लोगों या मलबे में फंसे लोगों के वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने से रोकने के लिए निर्देश जारी किए जाएं. उन्होंने कहा कि किसी मौत या दुखद घटना को सनसनीखेज नहीं बनाया जाना चाहिए.कोर्ट ने इस अनुरोध पर विचार करने की बात कही है. अब सभी संबंधित विभागों की रिपोर्ट और हलफनामे सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि सत्य निकेतन हादसे में प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं.

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