
पीड़िता का आरोप—घटना के बाद थाने में शिकायत और मेडिकल कराया, डेढ़ लाख रुपये देकर मामला दबाने की कोशिश का भी दावा
गाजियाबाद। गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में एक 36 वर्षीय नर्स ने एक युवक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि युवक ने उसे कार में जबरन बैठाया और मोरटा के पास उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के मुताबिक, आरोपी ने इस दौरान उसके आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए और घटना के बाद धमकी दी।
12 सितंबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, महिला का आरोप है कि उसने घटना के बाद पुलिस को डायल-112 पर सूचना दी और मधुबन बापूधाम थाने पहुंचकर शिकायत की, लेकिन कई दिन बीतने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई। महिला ने बाद में उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की।
पेट्रोल पंप पर हुई थी आरोपी से मुलाकात
महिला के मुताबिक, 24 अगस्त को एक पेट्रोल पंप पर उसकी मुलाकात आरोपी युवक से हुई थी। अगले दिन युवक उसके सोसायटी के पास आया और फोन कर उसे बाहर बुलाया।
पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद आरोपी उसे जबरन कार में ले गया और मोरटा के पास घटना को अंजाम दिया। महिला ने यह भी दावा किया कि आरोपी ने उसे धमकाया और बाद में रास्ते में छोड़कर फरार हो गया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
डेढ़ लाख रुपये देने का भी आरोप
महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी की ओर से उसे डेढ़ लाख रुपये देकर चुप रहने के लिए कहा गया। उसने पुलिस से आरोपी के खिलाफ कार्रवाई, गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हालांकि, इस भुगतान से जुड़े आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है। पुलिस जांच में ही यह स्पष्ट होगा कि कथित रकम किस परिस्थिति में दी गई और उसका घटना से क्या संबंध था।

पुलिस ने कहा—शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई
मामले में गाजियाबाद के डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने कहा कि पुलिस को महिला की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और शिकायत मिलने पर शीघ्र केस दर्ज कर जांच कराई जाएगी। महिला का दावा है कि उसने पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में मेडिकल जांच भी कराई और डीजीपी को ईमेल के जरिए शिकायत भेजी। उसने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई
मामला फिलहाल आरोपों और पुलिस के अलग-अलग पक्षों के बीच है। इसलिए आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। पुलिस जांच, मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


