
स्वराज इंडिया न्यूज ब्यूरो
काठमांडू
नेपाल और तिब्बत की सीमा पर ग्लेशियर से जुड़ी विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। 28 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 469 तक पहुंच गई है, जबकि नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,468 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक, तीर्थयात्री और श्रमिक भी इस आपदा की चपेट में आए हैं।
आपदा के बीच भारतीय नागरिकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। भारत सरकार लगातार नेपाल और चीन के अधिकारियों के संपर्क में है तथा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने का प्रयास जारी है। भारतीय नागरिकों से संबंधित आंकड़े लगातार सत्यापित किए जा रहे हैं और राहत अभियान के साथ संख्या में बदलाव हो रहा है।
ग्लेशियर टूटने के बाद मचा जलप्रलय
यह तबाही नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े पैमाने पर टूटने के बाद शुरू हुई। बर्फ, चट्टान, मलबे और पानी के तेज बहाव ने नदी घाटियों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र से जुड़े इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
सैटेलाइट तस्वीरों और शुरुआती भूवैज्ञानिक आकलनों में ग्लेशियर के नीचे चट्टानी हिस्से के ध्वंस और उसके बाद बड़े पैमाने पर मलबा नदी घाटी में आने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गर्म होते हिमालय में ग्लेशियरों और ऊंचाई वाले ढलानों की अस्थिरता ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है, हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने के लिए आगे अध्ययन जरूरी है।
दूसरी बाढ़ का खतरा भी बरकरार
पहली आपदा के बाद मलबे से बनी बैरियर झील ने राहत और बचाव अभियान के सामने नया खतरा पैदा कर दिया। पानी का स्तर बढ़ने की चेतावनी के बाद कुछ इलाकों में रेस्क्यू अभियान को अस्थायी रूप से सीमित किया गया। अधिकारियों ने निचले इलाकों में संभावित अचानक बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ाई।
हालांकि बाद के आकलन में कुछ स्थानों पर खतरा नियंत्रित माना गया और बचाव अभियान फिर शुरू किए गए। Reuters के अनुसार नेपाल और चीन के प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं खोज अभियान जारी हैं।
सड़कें और पुल तबाह, राहत अभियान चुनौतीपूर्ण
बाढ़ के तेज बहाव ने कई इलाकों में सड़क संपर्क और पुलों को नुकसान पहुंचाया है। कई गांवों तक जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल बना हुआ है। खराब मौसम, मलबे और भूस्खलन के खतरे के बीच हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है।
भारतीय नागरिकों पर नजर
भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार ने राहत और संपर्क अभियान तेज किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में मौजूद भारतीयों की जानकारी जुटाई जा रही है और कई लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। शुक्रवार को भी बचाए गए भारतीय नागरिकों की वापसी और संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया जारी रही।
हिमालय के लिए बड़ी चेतावनी
नेपाल की यह त्रासदी हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों, बर्फीले ढलानों और ग्लेशियल झीलों से जुड़े बढ़ते जोखिम की ओर ध्यान खींचती है। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे इलाकों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली, निगरानी और आपदा प्रबंधन को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
ताजा स्थिति एक नजर में
नेपाल में मौतें: 469
नेपाल और तिब्बत में लापता: 1,468 से अधिक
भारतीय नागरिक: संपर्क और बचाव को लेकर अभियान जारी
मुख्य प्रभावित क्षेत्र: नेपाल-तिब्बत सीमा और भोटेकोशी-त्रिशूली नदी तंत्र
मुख्य खतरा: बैरियर झील और अचानक फ्लैश फ्लड
रेस्क्यू: हेलीकॉप्टर और सुरक्षा बलों के जरिए अभियान जारी


