जिगरी दोस्त से जानी दुश्मनी तक पहुंची कहानी, एक बीघा जमीन का विवाद बना खूनी टकराव की वजह
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया के बहुचर्चित मंजुल चौबे और उनकी शिक्षिका बहन सुधा चौबे हत्याकांड में करीब छह साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष MP-MLA कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके दो भाइयों समेत 10 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
6 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला
यह मुकदमा करीब छह साल तक चला। सुनवाई के दौरान अदालत में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और अभियोजन तथा बचाव पक्ष की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद बुधवार को अदालत ने 10 आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
कभी दोस्त थे कमलेश पाठक और मंजुल चौबे
इस मामले की सबसे चर्चित कड़ी दोनों के पुराने रिश्ते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक कमलेश पाठक और मंजुल चौबे कभी बेहद करीबी दोस्त हुआ करते थे। मंजुल चौबे के छात्र राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में रहे थे।
बाद में राजनीतिक मतभेदों के साथ दोनों के रिश्तों में दूरी बढ़ती गई। मंजुल चौबे के भाजपा नेताओं के करीब आने और कमलेश पाठक के सपा की राजनीति में सक्रिय रहने के बीच दोनों के रास्ते अलग होते चले गए।
एक बीघा जमीन ने बढ़ाया विवाद
रिपोर्टों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर विवाद गहरा गया था। यही जमीन आगे चलकर दोनों पक्षों के बीच तनाव की बड़ी वजह बनी।
विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आए और मामला हिंसक हो गया। पुलिस की जांच और अभियोजन की दलीलों के आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा, जहां लंबी सुनवाई के बाद अब दोषसिद्धि हुई है।
अदालत ने इन 10 दोषियों को सुनाई उम्रकैद
अदालत से उम्रकैद पाने वालों में कमलेश पाठक, संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला और लवकुश सविता के नाम सामने आए हैं।
परिवार को छह साल बाद मिला न्याय
फैसले के बाद करीब छह वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे पीड़ित परिवार के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है। इस मामले ने औरैया में लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा पैदा की थी।
नोट: यह खबर अदालत और मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों पर आधारित है। दोषसिद्धि के संबंध में ऊपर दी गई जानकारी उपलब्ध ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार है।


