भ्रष्टाचार की कमाई से मिर्जापुर-सोनभद्र में खरीदे खनिजों के पहाड़

मुख्य संवाददाता स्वराज इंडिया लखनऊ।
उत्तर प्रदेश में “जीरो करप्शन स्टेट” के दावे के बीच जीएसटी विभाग के अफसरों पर भ्रष्टाचार का पहाड़ टूट पड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, पूर्वांचल में तैनात कुछ जीएसटी अफसरों ने अरबों की काली कमाई को छिपाने के लिए मिर्जापुर और सोनभद्र के खनिजों से भरे पहाड़ खरीद डाले।
सूत्र बताते हैं कि इन अफसरों ने विभाग में बाकायदा एक सिंडिकेट बनाकर यह खेल रचा। बताया जा रहा है कि नोटबंदी के समय जुटाई गई ब्लैक मनी से इन पहाड़ों की खरीद की गई। मिर्जापुर में सैंड स्टोन और सोनभद्र में डोलो स्टोन व लाइम स्टोन से भरे इन पहाड़ों की कीमतें सिंडिकेट ने टेंडर प्रक्रिया में 10 से 20 गुना तक बढ़ा दीं।
पहले जहां डोलो स्टोन का रेट ₹160 प्रति घन मीटर था, वहीं सिंडिकेट की चालबाजी से यह बढ़कर ₹3000 प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। इसी तरह मिर्जापुर का सैंड स्टोन ₹110 से बढ़कर ₹1000 प्रति घन मीटर तक बोला गया।

इतना ही नहीं, एक पहाड़ पर सालाना 20 से 30 करोड़ रुपये तक रॉयल्टी दी जा रही है। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि जीएसटी अफसरों ने ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए पहाड़ों को खरीदकर कुछ ही महीनों में सरेंडर कर दिया।
शासन के उच्च सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे प्रकरण पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और जीएसटी विभाग के भ्रष्ट अफसरों की सूची तैयार कराई जा रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
भ्रष्टाचार की ऊंचाई अब एवरेस्ट पार कर चुकी है — और इस बार पहाड़ों के पीछे छिपे हैं जीएसटी के अफसरों के ‘काले पहाड़’!


