
6 साल बाद भारत लौटीं डॉ रोहिणी घावरी, चंद्रशेखर आजाद पर लगाए आरोपों के बीच फिर चर्चा में
स्वराज इंडिया ब्यूरो/नई दिल्ली/बिजनौर। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ विवाद और उन पर लगाए गए आरोपों को लेकर चर्चा में रहीं डॉ रोहिणी घावरी करीब छह साल बाद शुक्रवार को स्विट्जरलैंड से भारत लौट आईं। दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचने के बाद उन्होंने अपने आगामी सामाजिक कार्यक्रमों और भारत में रहकर लोगों से जुड़ने की बात कही।
रिपोर्टों के मुताबिक दिल्ली एयरपोर्ट पर श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू, हिंदूवादी नेता दक्ष चौधरी और अक्कू पंडित सहित कुछ लोगों ने रोहिणी घावरी का स्वागत किया। उनकी भारत वापसी ऐसे समय हुई है जब चंद्रशेखर आजाद के साथ उनका विवाद एक बार फिर राजनीतिक और सोशल मीडिया चर्चा का विषय बना हुआ है।
चंद्रशेखर आजाद पर क्या आरोप लगाए हैं
डॉ रोहिणी घावरी ने पूर्व में सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया बातचीत में चंद्रशेखर आजाद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कथित निजी संबंधों के दौरान मानसिक, भावनात्मक और यौन शोषण के आरोप लगाए थे। जून 2025 में उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग में भी शिकायत किए जाने की जानकारी सार्वजनिक की थी।
हालांकि, ये रोहिणी घावरी के आरोप हैं और इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इस पूरे विवाद में चंद्रशेखर आजाद और उनके समर्थकों की ओर से भी रोहिणी घावरी के खिलाफ शिकायत/FIR की जानकारी सामने आई है।
‘मुझे कुछ हुआ तो जिम्मेदार होंगे’
भारत लौटने के बाद रोहिणी घावरी ने सुरक्षा और संभावित हमले को लेकर भी तीखे शब्दों में अपनी बात रखी। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए चंद्रशेखर आजाद और उनकी भीम आर्मी जिम्मेदार होगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह डरकर घर बैठने वाली नहीं हैं और देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों से मिलेंगी।
राजनीतिक सक्रियता के संकेत
रोहिणी घावरी ने भारत लौटने के बाद शिक्षा, समानता और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कही है। उन्होंने देशभर में लोगों से मिलने और सामाजिक बैठकों में हिस्सा लेने की योजना भी बताई है। रिपोर्टों के मुताबिक उनका कार्यक्रम दिल्ली के अलावा मेरठ, लखनऊ और अन्य शहरों तक प्रस्तावित है।
स्विट्जरलैंड में पूरी की PhD
इंदौर की रहने वाली डॉ रोहिणी घावरी स्कॉलरशिप के जरिए स्विट्जरलैंड गई थीं, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और PhD पूरी की। उनकी भारत वापसी के साथ ही उनके सामाजिक और संभावित राजनीतिक भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।


