Saturday, September 12, 2026
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद विवाद: हाईकोर्ट से कमेटी को राहत, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मस्जिद कमेटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए जुर्माने और हर्जाने की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी.

स्वराज इंडिया ब्यूरो/सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद से जुड़े विवाद में मस्जिद कमेटी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. अदालत ने प्रशासन की ओर से लगाए गए 6 करोड़ 41 लाख रुपये के जुर्माने और हर्जाने की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. साथ ही, राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं.

मामले की सुनवाई जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने की. अदालत ने अभी विवाद का अंतिम निपटारा नहीं किया है. अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी.

यह विवाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर है. प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश दिया था. इसके बाद मामला जिला अदालत पहुंचा, जहां मस्जिद कमेटी को राहत नहीं मिली.

जुलाई 2026 में सहारनपुर के नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा माना था. अदालत ने मस्जिद कमेटी और कब्जेदारों से ₹6.41 करोड़ की रकम जुर्माने और हर्जाने के तौर पर वसूलने का आदेश दिया था. कमेटी ने इस फैसले को जिला जज की अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर 2026 को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी.

इसके बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया. भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच करीब 16 घंटे तक चली कार्रवाई में पूरा ढांचा गिरा दिया गया.मामले की शुरुआत मार्च 2025 में बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी. शिकायत के आधार पर राजस्व विभाग ने कलेक्ट्रेट परिसर की 315 वर्ग मीटर जमीन, खसरा संख्या 539, पर बने ढांचे की जांच शुरू की.प्रशासन का आरोप था कि सरकारी परिसर की जमीन पर बिना अनुमति धार्मिक ढांचा बनाया गया और वहां किराया वसूलने जैसी व्यावसायिक गतिविधियां भी की जा रही थीं. अधिकारियों के मुताबिक, यह जमीन पहले परिसर की पुरानी विश्रामशाला के लिए इस्तेमाल होती थी, जिसे बाद में धार्मिक ढांचे में बदल दिया गया.वहीं, मस्जिद कमेटी का दावा रहा है कि यह मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज है. मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन की कार्रवाई और अपनाई गई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.मस्जिद गिराए जाने के बाद कमेटी ने जिला अदालत के फैसले और प्रशासन की कार्रवाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी. सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल आर्थिक वसूली वाले आदेश पर रोक लगा दी है.इस अंतरिम राहत का मतलब यह है कि ₹6.41 करोड़ की वसूली पर फिलहाल रोक रहेगी, लेकिन इससे मस्जिद को लेकर विवाद का अंतिम फैसला नहीं हुआ है. हाईकोर्ट अब राज्य सरकार का जवाब मिलने के बाद मामले पर आगे सुनवाई करेगा.मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी विवाद हुआ था. मुस्लिम पक्ष और विपक्षी नेताओं ने प्रशासन पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की बात कही.

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