
स्वराज इंडिया ब्यूरो/उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों की करीब 1 करोड़ महिलाओं को प्रस्तावित योजना के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को रोजगार और छोटे कारोबार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के मुताबिक, केंद्र और प्रदेश की सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर लगातार काम कर रही है। योजना के तहत मिलने वाली रकम से महिलाएं नया कारोबार शुरू करने के साथ अपने पहले से चल रहे व्यवसाय का विस्तार भी कर सकेंगी।
योजना के तहत महिलाओं को कुल ₹1 लाख तक की आर्थिक मदद तीन चरणों में देने की तैयारी है।
- पहली किस्त: दिसंबर 2026 में ₹20,000
- दूसरी किस्त: ₹30,000
- तीसरी किस्त: ₹50,000
इस तरह तीनों किस्तों को मिलाकर महिला लाभार्थी को कुल ₹1 लाख तक की राशि उपलब्ध होगी।
योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के लिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लाभार्थी महिलाओं को विशेष क्रेडिट कार्ड जारी करने की भी तैयारी है। इसके जरिए महिलाओं को कारोबार से जुड़ी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को तीन साल की अवधि में लागू करने की तैयारी है। इसका मकसद ग्रामीण और छोटे स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराकर उनके कारोबार को मजबूत करना है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस योजना के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। करीब 1 करोड़ महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाली इस पहल के जरिए सरकार की पहुंच उनके परिवारों तक भी बढ़ सकती है।
हालांकि, योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ वितरण का अंतिम स्वरूप अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी है। सरकार महिला शक्ति केंद्र, डिजिटल आईडी कार्ड और ई-रिक्शा जैसी अन्य पहलों के जरिए भी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने पर जोर दे रही है।


