
कानपुर। कानपुर नगर में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में एक संपत्ति में कथित तोड़फोड़ और कब्जे की कोशिश के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल को 9 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने घटना के दिन की परिस्थितियों और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है।
पुलिस कार्रवाई पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की एकलपीठ ने योगेश कुमार सिंह की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने केस डायरी, राज्य सरकार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे और घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज व वीडियो के रंगीन फोटो का अवलोकन किया।
अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि उपलब्ध सामग्री से ऐसा प्रतीत होता है कि कानपुर नगर की जिला पुलिस शिकायतकर्ता के पति की संपत्ति को कथित रूप से ध्वस्त करने और उस पर कब्जा करने की कार्रवाई में शामिल थी। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए कहा कि पुलिस की ऐसी कार्रवाई को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फुटेज में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी का जिक्र
सुनवाई के दौरान विवेचक धर्म कुशवाहा व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहे। कोर्ट के समक्ष पेश सामग्री के मुताबिक कथित घटना दिनदहाड़े पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई। फुटेज में अपर पुलिस उपायुक्त कानपुर नगर कपिल देव के मौके पर मौजूद होने और आरोपी योगेश कुमार सिंह के उनके पास खड़े दिखाई देने का उल्लेख अदालत के रिकॉर्ड में किया गया है। एक अन्य आरोपी अरुण अवस्थी की मौजूदगी का भी जिक्र हुआ।
आरोपी योगेश कुमार सिंह को अंतरिम राहत
अदालत ने मामले में आरोपी याचिकाकर्ता योगेश कुमार सिंह को 9 सितंबर तक अंतरिम अग्रिम जमानत प्रदान की है। उन्हें विवेचना में सहयोग करने और साक्ष्यों या गवाहों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की हिदायत दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को दोपहर दो बजे निर्धारित है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए पुलिस की कथित भूमिका को गंभीर माना। कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब पुलिस कमिश्नर की व्यक्तिगत पेशी और उनके हलफनामे पर सबकी नजर रहेगी।
फिलहाल हाईकोर्ट के अगले आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में आगे क्या निर्देश देती है।


