Saturday, September 19, 2026
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‘बरसाती मेंढक’ वाले बयान के बाद नया सियासी वार, फूलन देवी को लेकर संजय निषाद ने खोला मोर्चा सपा से पूछे तीखे सवाल

फूलन देवी की हत्या पर संजय निषाद का बड़ा सवाल, बोले — ‘सुपारी किसने दी’

स्वराज इंडिया ब्यूरो/लखनऊ/गोरखपुर | 18 सितंबर 2026

उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ संजय निषाद ने पूर्व सांसद फूलन देवी की हत्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को दिए बयान और सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि फूलन देवी जब समाजवादी पार्टी से अलग होकर अपनी राजनीतिक राह बनाने की ओर बढ़ीं, उसके बाद उनकी हत्या कर दी गई। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि आखिर हत्या की कथित सुपारी किसने दी थी।

फूलन देवी को बताया समाज के लिए आइकॉन

संजय निषाद ने फूलन देवी को मछुआरा समाज और महिलाओं के लिए प्रेरणा तथा एक राजनीतिक आइकॉन बताया। उन्होंने कहा कि फूलन देवी के साथ अन्याय हुआ और उनकी हत्या से जुड़े सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। उनके मुताबिक, फूलन देवी ने अपनी सुरक्षा को लेकर तत्कालीन सरकार से चिंता जताई थी।

सपा से मोहभंग को लेकर उठाए सवाल

मंत्री ने दावा किया कि फूलन देवी पहले समाजवादी पार्टी के साथ आईं और सांसद बनीं, लेकिन बाद में उनका पार्टी से मोहभंग हुआ। संजय निषाद ने कहा कि उन्हें यह भी बताया जाना चाहिए कि फूलन देवी को अलग राजनीतिक संगठन बनाने की जरूरत क्यों महसूस हुई। उन्होंने इसी घटनाक्रम को उनकी हत्या से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। यह उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इन रिपोर्टों में नहीं हुई है।

अखिलेश यादव के हालिया बयान से जुड़ा राजनीतिक विवाद

यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी की ओर से फूलन देवी के राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए निषाद समाज के साथ अपने संबंधों को रेखांकित किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, सपा की ओर से कहा गया कि फूलन देवी को रिहा कराने और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में पार्टी की भूमिका रही थी। संजय निषाद ने इन दावों के जवाब में सपा और कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं।

‘बरसाती मेंढक’ वाले बयान से भी गरमाई सियासत

संजय निषाद ने आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में मछुआरा समुदाय को उन नेताओं से सतर्क रहने को कहा जो उनके अनुसार चुनावी मौसम में सक्रिय होते हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं के लिए ‘बरसाती मेंढक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समुदायों का उल्लेख किया।

2027 से पहले निषाद समाज पर राजनीतिक बयानबाजी तेज

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समुदाय को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ी हुई है। संजय निषाद का ताजा बयान फूलन देवी की राजनीतिक विरासत, निषाद समाज के प्रतिनिधित्व और चुनावी सक्रियता को एक साथ जोड़ता है। हालांकि, फूलन देवी की हत्या को लेकर संजय निषाद द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित जांच या आधिकारिक रिकॉर्ड से उनकी पुष्टि न हो।

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