
मार्ग प्रकाश विभाग में लाइनमैन के रूप में काम कर रहे युवक ने मांगा बकाया वेतन, नियुक्ति रिकॉर्ड की जांच से खुल सकता है पूरा खेल
स्वराज इंडिया ब्यूरो/ कानपुर। कानपुर नगर निगम में टेंडर से जुड़ी अनियमितताओं की जांच के बीच अब आउटसोर्सिंग और नियुक्तियों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मार्ग प्रकाश विभाग में लाइनमैन के तौर पर काम करने का दावा करने वाले एक युवक ने नगर आयुक्त से शिकायत कर करीब सात महीने के बकाया वेतन का भुगतान कराने और दोबारा काम पर रखने की मांग की है। शिकायत के बाद उसकी नियुक्ति और नगर निगम में काम करने से जुड़े रिकॉर्ड की जांच का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि युवक का दावा है कि उसने करीब सात महीने तक नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग में काम किया। उसकी उपस्थिति फेस रिकग्निशन सिस्टम के जरिए दर्ज होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, जांच का अहम सवाल यह है कि यदि युवक वास्तव में नियमित रूप से काम कर रहा था, तो उसकी नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड में उसका नाम किस रूप में दर्ज था।

बगैर नियुक्ति काम करने का आरोप
शिकायत में युवक ने अपने काम करने की अवधि और वेतन का हवाला देते हुए भुगतान की मांग की है। वहीं, नगर निगम के स्तर पर यदि उसकी नियुक्ति का कोई वैध रिकॉर्ड नहीं मिलता है, तो मामला और गंभीर हो सकता है। ऐसे में नियुक्ति पत्र, आउटसोर्सिंग एजेंसी के रिकॉर्ड, उपस्थिति डेटा, भुगतान संबंधी दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फेस रिकग्निशन ने बढ़ाए सवाल
कानपुर नगर निगम में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अप्रैल 2026 में नगर आयुक्त ने मार्ग प्रकाश विभाग के 10 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को अनुपस्थित पाए जाने पर सेवामुक्त किया था और सभी विभागाध्यक्षों को आउटसोर्स कर्मियों की रोजाना उपस्थिति तथा फेस रीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
ऐसे में अब किसी ऐसे व्यक्ति के फेस रिकग्निशन रिकॉर्ड की जांच अहम हो सकती है, जिसकी नियुक्ति पर ही सवाल उठ रहे हैं। इससे यह पता चल सकता है कि वह कितने दिनों तक सिस्टम में उपस्थित दर्ज हुआ और उसकी उपस्थिति को किस स्तर से सत्यापित किया गया।
पहले से जांच के घेरे में नगर निगम
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर पहले से जांच चल रही है। अगस्त 2026 में टेंडर से जुड़े मामले की जांच के लिए एसआईटी नगर निगम पहुंची थी और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों की जांच की गई थी।
इसके अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, वेतन और पीएफ से जुड़ी शिकायतें भी सामने आ चुकी हैं। सितंबर में कर्मचारियों ने एक आउटसोर्सिंग कंपनी पर वेतन से पीएफ की कटौती के बावजूद खाते से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए थे।
अब जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी
इस पूरे मामले में जांच के दौरान यह साफ करना जरूरी होगा कि युवक को किसने काम पर लगाया, किस एजेंसी या अधिकारी के माध्यम से उसकी तैनाती हुई, सात महीने तक उसकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज हुई और यदि वह बिना वैध नियुक्ति के काम कर रहा था तो उसके काम की निगरानी किस स्तर पर हुई।
फिलहाल, युवक की शिकायत में किए गए दावों और नियुक्ति संबंधी रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि रिकॉर्ड में अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।


