
कानपुर: 18 KM पैदल चलकर DM तक पहुंची रिंकी, दो महीने बाद खुद घर पहुंचे जिलाधिकारी
कच्चे घर, आर्थिक तंगी और बेटियों के भविष्य की चिंता से जूझ रही रिंकी मिश्रा की जिंदगी में दो महीने के भीतर आया बड़ा बदलाव, पक्का मकान, सरकारी योजनाओं का लाभ और रोजगार का मिला सहारा
कानपुर। कभी अपनी फरियाद लेकर करीब 18 किलोमीटर पैदल घाटमपुर तहसील पहुंची रिंकी मिश्रा के घर शनिवार को जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह खुद पहुंचे। 18 जुलाई को रिंकी ने संपूर्ण समाधान दिवस में अपनी समस्याएं डीएम के सामने रखी थीं। इसके बाद प्रशासन ने परिवार की स्थिति का जायजा लेकर पात्रता के आधार पर विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की। दो महीने बाद 19 सितंबर को जब डीएम बिरसिंहपुर पहुंचे, तब रिंकी के घर में बदलाव साफ नजर आया।

18 किलोमीटर पैदल लेकर पहुंची थी उम्मीद
नरवल क्षेत्र के बिरसिंहपुर गांव की रहने वाली रिंकी मिश्रा पति की मृत्यु के बाद दो बेटियों की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। परिवार आर्थिक अभाव से गुजर रहा था और पक्के मकान की सुविधा भी नहीं थी। 18 जुलाई को वह करीब 18 किलोमीटर पैदल चलकर घाटमपुर तहसील में आयोजित समाधान दिवस पहुंचीं और जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने अपनी समस्या रखी। उनकी शिकायत राशन कार्ड और सास के नाम दर्ज अंत्योदय राशन कार्ड के हस्तांतरण से जुड़ी थी।
रिंकी की स्थिति जानने के बाद डीएम ने तत्काल अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद घाटमपुर के एसडीएम अबिचल प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ रिंकी के घर पहुंचे और परिवार की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण किया। शुरुआती राहत के तौर पर राशन और अन्य जरूरी सामग्री के साथ ₹5,000 की आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई गई थी।
योजनाओं का लाभ, बन रहा पक्का मकान
प्रशासन की पहल के बाद रिंकी के परिवार को पात्रता के अनुसार कई सरकारी योजनाओं से जोड़ा गया। उन्हें अंत्योदय राशन कार्ड, रसोई गैस कनेक्शन, निराश्रित महिला पेंशन और आयुष्मान कार्ड का लाभ मिला। दिव्यांग बेटी का यूनिक आईडी कार्ड भी बन गया है। बेटियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।
वहीं, जनसहयोग और सरकारी प्रयासों से रिंकी का पक्का मकान भी निर्माणाधीन है। 19 सितंबर को जिलाधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की प्रगति देखी और परिवार से बातचीत की। रिपोर्टों के मुताबिक मकान की दीवारें खड़ी हो चुकी हैं और आगे लिंटर का काम प्रस्तावित है।

मदद के साथ रोजगार का रास्ता भी खुला
रिंकी के लिए बदलाव केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहा। उन्हें घर के पास स्थित प्राथमिक विद्यालय में रसोइया के रूप में काम मिला है। इससे परिवार के लिए आय का एक नियमित जरिया बना है।
बेटी अदिति की पढ़ाई को भी मिला सहारा
रिंकी की छोटी बेटी अदिति की पढ़ाई को भी प्रशासन की ओर से सहयोग मिला। जिलाधिकारी की पहल पर उसका पंडित राम यश मेमोरियल एजुकेशन सेंटर में दाखिला कराया गया और फीस जमा कराई गई। रिपोर्ट के अनुसार कक्षा सात की छात्रा अदिति ने यूनिट टेस्ट में प्रथम स्थान हासिल किया है।
डीएम से मुलाकात के दौरान अदिति ने बड़ी होकर जिलाधिकारी बनने और लोगों की मदद करने की इच्छा जताई। इस बातचीत ने इस पूरी कहानी को एक भावनात्मक मोड़ दिया।
18 जुलाई से 19 सितंबर तक बदली तस्वीर
18 जुलाई को जहां रिंकी अपनी समस्याएं लेकर 18 किलोमीटर पैदल चलकर डीएम तक पहुंची थीं, वहीं 19 सितंबर को जिलाधिकारी खुद उनके घर पहुंचे। दो संपूर्ण समाधान दिवसों के बीच हुए इस बदलाव में प्रशासनिक हस्तक्षेप, सरकारी योजनाओं का लाभ और रोजगार से जुड़ी पहल अहम रही।


