Sunday, September 13, 2026
HomeInternationalBRICS Summit में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, साझा घोषणापत्र पर बनी...

BRICS Summit में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, साझा घोषणापत्र पर बनी सहमति

स्वराज इंडिया ब्यूरो/ नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल हुई है। BRICS सदस्य देशों ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणापत्र को सहमति से स्वीकार कर लिया। कई दिनों की बातचीत और अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद के बीच साझा भाषा पर सहमति बनना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई है। BRICS देशों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की है, जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए करने पर जोर दिया गया है।

भारत के लिए आतंकवाद पर बड़ा संदेश

नई दिल्ली घोषणापत्र का एक महत्वपूर्ण पहलू आतंकवाद के खिलाफ BRICS की साझा प्रतिबद्धता है। घोषणापत्र में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है। BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराते हुए आतंकवादियों की आवाजाही, आतंकी वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई है।

भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि BRICS में चीन समेत कई ऐसे देश शामिल हैं, जिनके भारत के साथ रणनीतिक और कूटनीतिक संबंध जटिल रहे हैं। इसके बावजूद पहलगाम हमले को लेकर साझा घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख सामने आया है। हालांकि घोषणापत्र में किसी देश को सीधे तौर पर हमले के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।

पश्चिम एशिया के तनाव पर संयम की अपील

BRICS देशों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। घोषणापत्र में अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने की अपील की गई है, जो स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं।

सदस्य देशों ने बातचीत, परामर्श और कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता बताया। यह सहमति ऐसे समय बनी है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ रहा है।

मोदी-शी जिनपिंग मुलाकात भी रही अहम

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच भी द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए व्यापारिक संपर्क और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा है। शी जिनपिंग का यह सात साल बाद भारत दौरा है।

पुतिन और पेजेशकियन से भी मोदी की बातचीत

BRICS सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। रूस के साथ ऊर्जा, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सहयोग तथा पश्चिम एशिया की स्थिति भी बातचीत के प्रमुख विषयों में रही।

भारत की अध्यक्षता में BRICS का एजेंडा

भारत ने 2026 में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली है। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। भारत ने BRICS को विकास, नवाचार, स्थिरता और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने वाले मंच के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS को किसी के खिलाफ गठबंधन बनाने के बजाय सहयोग और साझेदारी का मंच बताया है। उन्होंने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घोषणापत्र

नई दिल्ली घोषणापत्र ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। पश्चिम एशिया का संघर्ष, यूक्रेन युद्ध, व्यापारिक प्रतिबंध और बढ़ते टैरिफ जैसे मुद्दों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।

ऐसे माहौल में BRICS के भीतर साझा घोषणापत्र पर सहमति बनना भारत की कूटनीतिक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। खास तौर पर आतंकवाद, पश्चिम एशिया और वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर साझा भाषा तैयार करना आसान नहीं था।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!