
नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर शुक्रवार को दिल्ली में तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा समेत 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई, जबकि सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखा गया है।
यह मार्च CJP के दो नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी के विरोध में आयोजित करने की घोषणा की गई थी। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी नारेबाजी और इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध सामने आया।
अभिजीत दिपके झंडेवालान से हिरासत में लिए गए
दिल्ली पुलिस ने मार्च से पहले अभिजीत दिपके को नोटिस देकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस की टीम उनके झंडेवालान स्थित अस्थायी निवास पर पहुंची थी। इसके बाद जब वह बाहर निकले और प्रस्तावित मार्च में शामिल होने के लिए आगे बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
पुलिस का कहना था कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों, दुकानदारों तथा यात्रियों को परेशानी से बचाने का हवाला दिया।
मंडी हाउस से नेहा बोरा भी हिरासत में
AISA प्रमुख नेहा बोरा को भी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए आगे बढ़ते समय मंडी हाउस के पास हिरासत में लिया गया। उनके साथ कुछ अन्य छात्र नेताओं और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी पुलिस ने कार्रवाई की।
नेहा बोरा के सहयोगियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि हिरासत के बाद उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा था। इस दावे के बाद उनकी स्थिति और लोकेशन को लेकर सवाल उठे। पुलिस की कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों, सुरक्षाकर्मियों और मीडिया के बीच धक्का-मुक्की की खबरें भी सामने आईं।
सेंट्रल पार्क दो दिन बंद, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रस्तावित मार्च को देखते हुए नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला किया। इलाके में बैरिकेडिंग की गई और पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई।
कनॉट प्लेस, राजीव चौक, मंडी हाउस और आसपास के प्रमुख स्थानों पर निगरानी रखी गई। पुलिस ने लोगों से निषेधाज्ञा का पालन करने और प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जमा नहीं करने की अपील की।
सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कई प्रदर्शनकारी हाथों में तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पहुंचे। पुलिस ने ऐसे लोगों को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की। दिनभर चले घटनाक्रम के दौरान 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई।
आखिर क्यों निकाला जाना था ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च?
CJP ने अपने दो सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास की गिरफ्तारी के विरोध में इस मार्च का आह्वान किया था। पार्टी के अनुसार, यह कार्यक्रम तिरंगा फहराने और विरोध जताने के अधिकार से जुड़ा है। वहीं, पुलिस का कहना था कि किसी भी सार्वजनिक सभा या मार्च के लिए लागू नियमों और प्रतिबंधों का पालन जरूरी है।
प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया गया। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रहे थे और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी आपत्तियां जता रहे थे। इन आरोपों और राजनीतिक दावों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रियाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
सेंट्रल पार्क बंद करने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सेंट्रल पार्क को बंद रखने के NDMC के आदेश के खिलाफ व्यापारिक संगठनों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि पार्क बंद रहने और विरोध प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस के दुकानदारों तथा छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया। अदालत ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष समझदारी से काम लेंगे और छोटे दुकानदारों की रोजी-रोटी पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संकेत दिया कि यदि यह पाया जाता है कि प्रशासनिक प्रतिबंध अनुचित या जरूरत से ज्यादा कठोर थे और उनसे कारोबारियों को नुकसान हुआ, तो उचित कानूनी राहत या मुआवजे पर विचार किया जा सकता है। मामले पर आगे सुनवाई 26 या 27 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना जताई गई।
विरोध के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौती
दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को लेकर पैदा हुई स्थिति ने सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन की अनुमति, नागरिकों के विरोध के अधिकार, दुकानदारों की आजीविका और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल फिर सामने ला दिया है।
एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना चाहते हैं, वहीं प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और आम लोगों की सुविधा का हवाला दे रहा है। अब आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों के अगले कदम और अदालत में होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की हिरासत, सेंट्रल पार्क को बंद रखने का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया और प्रशासन के अगले कदम महत्वपूर्ण रहेंगे।


