
कानपुर की सड़कों पर फिर उतरे मंडलायुक्त पांडियन, दो दिन में पैचवर्क का अल्टीमेटम; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
कानपुर में बदहाल सड़कों को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। मंडलायुक्त के. विजयेंद्र पांडियन ने शुक्रवार को एक बार फिर शहर की प्रमुख सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने कई मार्गों पर क्षतिग्रस्त हिस्सों और गड्ढों की स्थिति देखी और संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी एनएच खंड के अधिकारियों को खराब हिस्सों का पैचवर्क युद्धस्तर पर कराकर दो दिन के भीतर सड़कें आवागमन योग्य बनाने का अल्टीमेटम दिया गया है।
बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कों की हालत खराब होने और जगह-जगह गड्ढे होने को लेकर प्रशासन लगातार समीक्षा कर रहा है। मंडलायुक्त पांडियन ने इससे पहले भी अधिकारियों को सितंबर के अंत तक शहर की सड़कों को मोटरेबल बनाने के निर्देश दिए थे। अब उन्होंने खुद मौके पर पहुंचकर सड़क मरम्मत के काम की स्थिति देखी।
रामादेवी से आईआईटी तक सड़क का निरीक्षण
मंडलायुक्त ने रामादेवी से आईआईटी मार्ग, मैनावती मार्ग, सिंहपुर से कल्याणपुर मार्ग और स्वरूप नगर से नवाबगंज मार्ग समेत कई प्रमुख सड़कों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सड़क की स्थिति, क्षतिग्रस्त हिस्सों और जहां तत्काल पैचवर्क की जरूरत है, उन स्थानों को देखा।
निरीक्षण के दौरान पीडब्ल्यूडी एनएच खंड के तहत आने वाली सड़कों पर आवश्यक मरम्मत नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई। अधिशासी अभियंता ए.के. जयंत को निर्देश दिया गया कि जिन स्थानों पर सड़क खराब है, वहां युद्धस्तर पर पैचवर्क कराया जाए।
दो दिन में सड़कें मोटरेबल करने का निर्देश
मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि मुख्य मार्गों पर गड्ढों और टूटे हिस्सों के कारण यातायात प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को दो दिन के भीतर पैचवर्क पूरा कर सड़कों को मोटरेबल बनाने के निर्देश दिए हैं।
सिर्फ पैचवर्क नहीं, गुणवत्ता पर भी जोर
मंडलायुक्त ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि सड़क मरम्मत केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। काम की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जाए और जहां सड़क ज्यादा क्षतिग्रस्त है, वहां तकनीकी जरूरत के अनुसार स्थायी समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों को बेहतर स्थिति में रखना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो, इसके लिए नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और अन्य संबंधित एजेंसियां अपने-अपने क्षेत्र की सड़कों की लगातार निगरानी करें।
नगर निगम की 38 सड़कों पर चल रहा काम
इससे पहले हुई समीक्षा में नगर निगम की ओर से बताया गया था कि 38 सड़कों की मरम्मत का काम चल रहा है। मंडलायुक्त ने इन कार्यों को एक सप्ताह में पूरा करने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा शहर की अन्य खराब सड़कों का सर्वे कर प्राथमिकता के आधार पर पैचवर्क कराने को कहा गया है।
सितंबर के अंत तक सड़कों को सुधारने का लक्ष्य
प्रशासन ने शहर की सड़कों को सितंबर के अंत तक आवागमन के लिए सुगम बनाने का लक्ष्य रखा है। मंडलायुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट किया है कि खराब सड़कों और गड्ढों की वजह से आम जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। जहां तत्काल पूरा निर्माण संभव नहीं है, वहां अस्थायी रूप से पैचवर्क कर सड़क को मोटरेबल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
टेंडर संकट भी बनी चुनौती
दूसरी ओर, नगर निगम में चल रही जांच और टेंडर प्रक्रिया में कम भागीदारी भी सड़क मरम्मत के काम के सामने चुनौती बनी हुई है। हाल की रिपोर्ट के मुताबिक 1.60 करोड़ रुपये के 19 हॉट मिक्स पैचवर्क कार्यों के लिए एक भी ठेकेदार आगे नहीं आया था। कई अन्य कार्यों में भी पर्याप्त टेंडर नहीं मिलने के कारण री-टेंडरिंग की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
ऐसे में प्रशासन के सामने एक तरफ शहर की खराब सड़कों को जल्द ठीक कराने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ समय पर काम कराने और उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी है।
मंडलायुक्त के लगातार निरीक्षण और सख्त समयसीमा के बाद अब निगाह इस बात पर है कि तय दो दिन और सितंबर के अंत तक सड़क मरम्मत के निर्देश जमीन पर कितने प्रभावी साबित होते हैं।


