
संदीप जैन और रज्जन बाजपेई 14 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगने और टेंडर वापस लेने का दबाव बनाने का आरोप
कानपुर। कानपुर नगर निगम के ठेका विवाद और कथित रंगदारी मामले में जेल भेजे गए दो ठेकेदारों संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को अदालत से जमानत मिल गई है। दोनों को एडीजे-19 अभय प्रकाश नारायण की अदालत ने एक-एक लाख रुपये की दो जमानतें और निजी मुचलका दाखिल करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश दिया है।
14 दिन पहले भेजे गए थे जेल
संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को नगर निगम के ठेकों से जुड़े विवाद में रंगदारी और धमकी के मामले में गिरफ्तार किया गया था। दोनों को करीब 14 दिन पहले जेल भेजा गया था। अब अदालत से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
10 लाख रुपये मांगने का आरोप
मामला किदवई नगर निवासी ठेकेदार सनी सिंह भदौरिया की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक जुलाई में सनी को कथित तौर पर टेंडर वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया और 10 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे फोन पर धमकाया गया और कहा गया कि संबंधित टेंडर से अपनी दावेदारी वापस ले ले। इस मामले में गोविंद शर्मा, संदीप जैन और रज्जन बाजपेई के खिलाफ फजलगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस ने दोनों को किया था गिरफ्तार
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वहीं मामले में नामजद मुख्य आरोपी बताए जा रहे गोविंद शर्मा की तलाश जारी होने की रिपोर्ट सामने आई थी।

नगर निगम के टेंडर विवाद से जुड़ा बड़ा मामला
यह मामला केवल रंगदारी की शिकायत तक सीमित नहीं है। कानपुर नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भी प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई हुई है।
रिपोर्टों के अनुसार जांच के बाद नगर निगम ने करोड़ों रुपये के कई टेंडर निरस्त किए और कई फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया गया। मामले की जांच के लिए एसआईटी भी नगर निगम पहुंची और अधिकारियों तथा संबंधित दस्तावेजों की जांच की।
कई एफआईआर के बाद बढ़ी कार्रवाई
नगर निगम टेंडर प्रकरण में अलग-अलग शिकायतों के आधार पर कई एफआईआर दर्ज की गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार पांच मुकदमे नगर निगम की शिकायत पर स्वरूप नगर थाने में और एक मुकदमा ठेकेदार की शिकायत पर फजलगंज थाने में दर्ज हुआ था। आरोपों में धोखाधड़ी, धमकी और रंगदारी से संबंधित धाराएं शामिल हैं।
जमानत का मतलब आरोप खत्म होना नहीं
अदालत से जमानत मिलने के बाद दोनों ठेकेदारों को मामले में राहत मिली है, लेकिन इससे उनके खिलाफ लगाए गए आरोप समाप्त नहीं होते। मुकदमे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगी।
टेंडर प्रक्रिया पर भी प्रशासन की नजर
कानपुर नगर निगम में टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद प्रशासन ने ई-टेंडरिंग और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। जांच एजेंसियां टेंडर से जुड़े दस्तावेजों और कथित सिंडिकेट की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।


