नगर विकास मंत्री और प्रमुख सचिव ने केडीए और नगर निगम की जमीन के मुद्दे पर की वर्चुअल बैठक
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनी समस्या, पार्षद वेलफेयर ने
भी समस्याओं से कराया अवगत
प्रमुख संवाददाता स्वराज इंडिया / कानपुर

कानपुर सिटी में नगर निगम और केडीए के बीच चल रहा जमीनों का विवाद शासन स्तर पर भी पहुंच गया है। नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने जमीनों को लेकर नगर विकास मंत्री और प्रमुख सचिव के सामने अपना पक्ष रखा। इस दौरान पार्षद वेलफेयर के पदाधिकारियों ने भी जमीनों पर केडीए की मनमानी का आरोप लगाया। नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने जल्द ही शासन स्तर पर सम्बन्धित प्रकरणों का निर्णय लिये जाने आश्वासन दिया।
नगर निगम मुख्यालय स्थित सभागार कक्ष में सम्भव पोर्टल पर दर्ज प्रकरण की वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये बैठक हुई। इसमें नगर विकास मंत्री अरविन्द कुमार शर्मा एवं प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग अमृत अभिजात से नगर आयुक्त सुधीर कुमार ने नगर निगम के प्रकरण पर अपना पक्ष रखा। पार्षद वेलफेयर एसासिएशन के पदाधिकारियों को भी इस बैठक में जुड़ने को कहा गया था जिसपर उन्होंने भी मंत्री को पूर्व में दिये तीन पत्रों पर अपनी बात रखी। एसोसिएशन के संरक्षक अमित पाण्डेय और अध्यक्ष नवीन पण्डित ने बैठक में कहा कि कानपुर नगर निगम एवं केडीए के विवाद आयुक्त कानपुर मण्डल को भेजे जाते हैं। क्योंकि आयुक्त कानपुर मण्डल कानपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष है। इसलिये उनके द्वारा कानपुर विकास प्राधिकरण के पक्ष में निर्णय लिया जाता है। इसलिये किसी अन्य अधिकारी को कानपुर नगर निगम एवं कानपुर विकास प्राधिकरण के विवादों पर नियुक्त किया जाए।
केडीए द्वारा मनमानी कर जमीनों पर लाई जा रही परियोजना
नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि जाजमऊ में नगर निगम की सीवेज फार्म की 1200 एकड़ भूमि है। फिर भी केडीए ने अपनी बोर्ड बैठक में दो परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। बताया कि यह भूमि सीवेज फार्म है और हाई कोर्ट इलाहाबाद के पारित आदेश में भूमि का प्रयोग बदला नहीं जा सकता है। पदाधिकारियों ने आरोप लगाते हुये कहा कि केडीए मनमानी करते हुए परियोजनाओं का लागू करा रहा है। स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट में भी भूमि सम्बन्धी विवाद आये थे। केडीए को ग्राम समाज एवं इम्प्रूवमेन्ट ट्रस्ट की भूमि का अधिकार दे दिया गया है, ये व्यवस्था सिर्फ कानपुर में है, अन्य 16 नगर निगमों में नहीं।
74वां संशोधन लागू हो, महापौर ने पंचकुला में उठाया मुद्दा
74वां संशोधन लागू होने की वजह से मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र के शहर आगे बढ़ते जा रहे हैं जबकि शहर पिछड़ रहा है। जब स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग की बारी आती है तो सभी प्रदेश के शहर को समान आधार से ही रैंकिंग में जोड़ा जाता है। इस वजह से हम नीचे आते हैं। जबकि इंदौर पहले नंबर पर काबिज हो जाता है। यह मुद्दा रविवार को पंचकुला में हुई आल इंडिया मेयर एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक महापौर प्रमिला पांडेय ने उठाया है। महापौर ने कहा कि इसलिये जहां 74वां संशोधन लागू है उन शहरों की स्वच्छता रैंकिग अलग की जाए जब कि हमारे जैसे शहरों की रैंकिंग अलग जारी की जाए। उन्होंने बताया कि 264 महापौरों के सामने यह मुद्दा उठाया है। इसपर शहरी विकास मंत्रालय को जल्द प्रस्ताव देंगे। 74वां संशोधन लागू होने से जहां नगर निगम की शक्तियां बढ़ेंगी वहीं आम लोगों तक सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिलेगी।