स्वराज इंडिया संवाददाता/अयोध्या

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की “भवन निर्माण एवं विकास उपविधि 2025” योजना की घोषणा ने आम जनता के चेहरे पर थोड़ी राहत की उम्मीद जरूर जगाई थी, लेकिन अयोध्या विकास प्राधिकरण के अफसरों ने उस उम्मीद को फाइलों में कैद कर दिया है। योगी जी ने कहा था—1000 वर्गफीट तक मकान बनाने के लिए नक्शा पास नहीं कराना होगा, कोई शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन रामनगरी में राजाज्ञा भी जेई की मर्जी से चलती है!
नगर निगम क्षेत्र में रवि साहू ने 800 वर्गफीट की भूमि खरीदी। मुख्यमंत्री की घोषणा पर भरोसा करके मकान निर्माण शुरू किया। बैंक ने ऋण भी स्वीकृत कर दिया। लेकिन विकास प्राधिकरण के ‘चौकन्ने’ जेई चन्दन गुप्ता को ये सब नागवार गुज़रा। उन्होंने न सिर्फ निर्माण रुकवाया, बल्कि 1200 वर्गफीट की काल्पनिक रिपोर्ट बना डाली। दूसरे मकान की फोटो जोड़कर एक धमकी भरी नोटिस रवि को थमा दी—”क्यों न निर्माण गिरा दिया जाए?”
बड़ा सवाल उठता है ?
अगर सीएम की घोषणा का आदेश नहीं आया था, तो बैंक को लोन किस आधार पर मिला? और अगर आदेश नहीं आया था, तो जेई ने झूठी फोटो और फर्जी स्केल का सहारा क्यों लिया?
यह न तो सिफ़र की गलती है, न कोई तकनीकी भ्रम। यह वही ‘सिस्टम’ है, जिसमें फाइलें चाय की प्याली पर चलती हैं, और नियम जेई की जेब में रखे जाते हैं। सत्तारूढ़ दल के नेता भी अब अफसरशाही की ढीठ व्यवस्था पर उंगली उठा रहे हैं—क्योंकि जब जेई “क्लिक” कर दे, तो मुख्यमंत्री की “क्लिक” भी “डिलीट” हो जाती है।
स्वराज इंडिया का मानना है कि-

प्राधिकरण का यह “विकास मॉडल” अब नई परिभाषा लिख रहा है—जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार का निर्माण, और ईमानदार लोगों का विध्वंस। मतलब की जब तक शासनादेश प्राधिकरण की ‘सुविधा’ के अनुसार न आए, तब तक रामनगरी में केवल भ्रष्टाचार का नक्शा ही पास होगा।
सरकार की मंशा को लागू ना करने के लिए अयोध्या बीजेपी के पूर्व महानगर अध्यक्ष अभिषेक मिश्र ने विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। मुख्यमंत्री की घोषणा का अनुपालन ना होने के संदर्भ में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश पांडेय का कहना है कि अभी सिर्फ सैद्धांतिक सहमति हुई है, शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
एडीए के जेई चंदन गुप्ता का कहना है कि हम साईट पर गए रवि को कागज दिखाने के लिए बुलाया गया वह 15 दिन तक नही आये तब नोटिस भेजी गई। 787 स्क्वायर फ़ीट की जगह 1200 स्क्वायर फ़ीट की नोटिस क्यों काटी गई इस सवाल पर उनका कहना है कि जब मालिक नही मिलता तो जो मौके पर मिलता है ठेकेदार मजदूर वह जो भी बताता है लगभग करके लिख दिया जाता है। इस मामले में किसी प्रकार की विभागीय चूक के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमसे कोई गलती नही हुई है।